देश में अब तक की सबसे ज्यादा किसान विरोधी सरकार है: योगेंद्र यादव

India Today Conclave 2019 इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में किसानों की समस्याओं पर बात करते हुए ज्यादातर एक्सपर्ट ने यह कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है.

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स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव (फोटो: इंडिया टुडे) स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव (फोटो: इंडिया टुडे)

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 6:15 PM IST

राजनीतिज्ञ और किसान आंदोलन से जुड़े नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के सभी उपाय सरकारी फाइलों में बंद हैं, बस उन्हें लागू करने की राजनीतिक इच्छा शक्ति होनी चाहिए. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 के दौरान आयोजित सत्र 'रेड अलर्ट: फार्म क्राइसिस: द इश्यू ड्राइविंग इलेक्शन 2019' सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही. उन्होंने कहा कि देश में अब तक की सबसे किसान विरोधी सरकार है. इस सत्र में शामिल कृषि जगत के सभी एक्सपर्ट और लीडर्स ने यह बात स्वीकार की कि किसानों की समस्या का कोई एक समाधान नहीं है और इसके लिए कई तरह के सुधार करने होंगे. इस सत्र का संचालन इंडिया टुडे टीवी के सलाहकार संपादक राजदीप सरदेसाई ने किया.

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योगेंद्र यादव ने कहा, 'किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सभी अच्छे समाधान सरकारी फाइलों में मौजूद हैं, बस उसे लागू करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए. तीन चुनाव के बाद मौजूदा सरकार किसानों के लिए 75,000 करोड़ रुपये देने को तैयार हो जाती है.'

योगेंद्र यादव ने कहा, 'किसानों की लगातार उपेक्षा की गई. यह किसी एक सरकार की बात नहीं है. लेकिन अच्छे भले-चंगे किसान को पिछले सत्तर साल में सरकारों ने मरीज बना दिया और मोदी जी ने इसे आईसीयू में पहुंचा दिया. पिछले पांच साल में देश में सबसे किसान विरोधी सरकार है. किसान पिछले दो-तीन दिनों से किसान सेंटर स्टेज में आ गया है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह फिर से गायब हो गया है.'

किसान केंद्रित नीति की जरूरत

कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी ने कहा, 'समाधान है, लेकिन हमें अपनी सोच बदलकर किसान केंद्रित नीति बनानी होगी. हमारी नीति अब भी 50-60 के दशक की है. हमारा पूरा जोर कीमतें कम करने पर है. इन सब प्रयास में किसान और गरीब होता है. किसानों की मदद करना चाहते हैं तो हमें यह देखना होगा कि क्या 20 फीसदी जनता को सपोर्ट देना है या 75 फीसदी जनता को सब्सिडी देकर 2 रुपये किलो अनाज देना है. किसान प्रतिबंधात्मक ट्रेड और मार्केटिंग पॉलिसी की वजह से जरूरत से 14 फीसदी कम आय हासिल करते हैं. पिछले सत्तर साल 45 लाख करोड़ रुपये किसानों का धन गरीबी हटाने के नाम पर लूट लिया गया है.

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कर्नाटक से राज्यसभा सांसद राजीव गौड़ा से जब सवाल किया गया कि कांग्रेस किसानों की कर्जमाफी या एमएसपी बढ़ाने जैसे शॉर्ट टर्म उपाय करती है तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'कर्जमाफी और एमएसपी तात्कालिक उपाय हैं. असल समस्या दूर करने के लिए संरचानात्मक बदलाव करने होंगे. ग्रामीण आय को स्थि‍र बनाना होगा, उनकी कर्ज पहुंच आसान करनी होगी, उनके खेती पर रिटर्न यानी आय को बढ़ाना होगा. आयात-निर्यात नीति को किसानों की बेहतरी से जोड़ना होगा.'

अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव विजू कृष्णन ने कहा, 'सामाधान तभी संभव है, जब राजनीतिक इच्छाशक्ति हो. हमने जो विरोध प्रदर्शन किया उसकी वजह से हमें सरकार के सामने किसानों की समस्या पहुंचाने में सफलता मिली. हम सबको राजनीति से ऊपर उठकर किसानों की समस्याएं दूर करने के लिए काम करना होगा. किसानों को ऐसी कीमत मिलनी चाहिए जो उनकी लागत से ज्यादा हो. पीएम ने कहा था कि किसानों को प्रोडक्शन कॉस्ट के 50 फीसदी से ज्यादा मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. खरीद नी‍ति सही नहीं है और सरकारी खरीद होती नहीं.केरल में सरकार प्रति कुंतल धान पर 800 रुपये अतिरिक्त देती है. सरकारों की यह जिम्मेदारी होती है कि किसानों के बारे में सोचे. सरकारों ने ध्यान नहीं दिया, इसलिए समस्या हुई.'   

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कृषि एक्सपर्ट कविता कुरुगांती ने किसानों की समस्याओं के बारे में कहा, 'सबसे पहले तो यह स्वीकार करना होगा कि अगर कृषि क्षेत्र की समस्या दूर नहीं हुई तो अन्य सेक्टर की समस्या दूर नहीं होगी. किसानों की इनकम कम है, अस्थायी भी है. किसान भी उतने ही जरूरी काम कर रहे हैं जितना सीमा पर जवान देश की रक्षा में करते हैं. कीमत एक ऐसा रास्ता है जिससे किसानों को एक मिनिमम इनकम की गारंटी दी जा सकती है. ऐसी नीतियां बनानी होंगी जिससे किसानों की आय बढ़े.'

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