कोई भी कला अद्भुत हो जाती है जब इसमें आसपास का वातावरण, ऊर्जा और परिस्थितियां समाहित हो जाती हैं. ठीक उसी प्रकार जैसे किसी गाने के शब्द आपको याद नहीं होते लेकिन जब उस मधुर संगीत को आप सुनते हैं तो शब्द भी याद आते हैं और धुन आपको मंत्रमुग्ध कर देती है. एक शो के फोटोग्राफी के दौरान मेरा अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा.
पिछले साल 2018 में जब मैं India Couture week के दौरान फैशन डिजाइनर सुनीत वर्मा के शो में फोटोग्राफी के लिए पहुंचा तो रैंप पर जलवा बिखेरने से ठीक पहले मैंने एक मॉडल को देखा. वो गहरे रंग के भारी परिधान में अलौकिक खूबसूरती बिखेर रही थीं.
उसके चेहरे पर जो भाव थे, उसे बयां करना आसान नहीं है. वह अपनी मनमोहक पोशाक और श्रृंगार में सज कर पूरी तरह तैयार थी. रैंप पर जाने के पहले आखिरी मिनट की तैयारियों में वह व्यस्त थी. कभी वह आईने में अपने रूप को निहारती तो कभी परिधानों को.
इस साल 2019 में मैं फिर India Couture week में सुनीत वर्मा के शो में फोटोग्राफी के लिए पहुंचा. लेकिन इस बार शो की जगह अजीब थी, एक मॉल. यहां कोई बैकस्टेज नहीं था, कोई आईना नहीं था और ना ही एंबियंस लाइट और ना ही फोटोग्राफी के लिए ठीक जगह. लेकिन जैसे ही अंधेरे को चीरती हुई सेल्फी कैमरे की लाइट मॉडल के बालों पर पड़ी तो मंत्रमुग्ध करने वाला समां बंध गया. सफेद लाइट की रोशनी में नहाते उसके जुल्फ खूबसूरत छटा बिखेर रहे थे.
अब भी फोटोशूट के लिए सही जगह नहीं मिल रही थी. रैंप पर एंबियंस लाइट का अभाव था. मैंने अपना कैमरा बगल में रखा और शो देखने लगा. लेकिन शो के शुरू होने के पांच मिनट बाद ही कुछ जादुई चीजें हुईं.
चूंकि शो एक मॉल में हो रहा था. इसलिए वहां रैंप के पास कपड़े बदलने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं थी. रैंप पर एक बार परफार्मेंस देने के बाद मॉडल को दूसरे परफार्मेंस के लिए ड्रेस बदलने की जल्दी थी.
तभी मेरी नजर एक खूबसूरत मॉडल पर पड़ी. अजीब सुंदरता थी. वह मनमोहक लहंगा और गाऊन में बहुत ही मनमोहक लग रही थी.
मार्बल फ्लोर पर उसके लंबे-लंबे पैर पड़े और जब वह मेरे बगल से गुजरी तो मेरी नजर उसके चेहरे के भाव पढ़ने लगी. जैसे ही उसकी नजर मेरे कैमरे पर पड़ी उसके चेहरे पर मधुर मुस्कान बिखर गई.
मेरे कैमरे में कैद उस खूबसूरत मॉडल की अदा कुछ और ही बन गई. शायद उसे जुबां से बयां करना कल्पनाओं से परे है. उसके चहरे के भाव, भारी भरकम गाऊन को जब उसने अपनी नाजुक हथेली से उठाकर भागने की कोशिश की और तेजी से शर्माती सकुचाती ड्रेस बदलने के लिए भागी तो ऐसा लग रहा था मानो कोई प्रेयसी सोलह श्रृंगार कर अपने प्रेमी से मिलने जा रही हो.
विरह के बाद प्रेमी से मिलन की अवस्था में नायिका की ये स्थिति वैसी है जैसे बिना बादल के वो सावन की फुहारों में भीग रही है. और दौड़कर प्रेमी के पास पहुंचना चाहती है.
ठीक वैसे ही जैसे भारतीय कला की कृष्णा अभिसारिका. जो विरह की आग में तड़पती, प्रेमी से मिलने के लिए अपना सुदबुध खो देती है. वह सांप और अन्य खतनाक जीव-जन्तुओं से भरे घनघोर जंगल में अपने प्रेमी से मिलने के लिए बिल्कुल निर्भिक होकर आगे बढ़ती है. यहां मॉडल के हावभाव और मनोदशा उसी अभिसारिका की तरह लग रही थी.
अद्भुत था वह नजारा. मुख्य घटना से अलग यह कल्पना से परे नजारा था. यह बिल्कुल अपने तरह का शो बन गया.
aajtak.in