भारत की पहली महिला बैरिस्टर को गूगल ने डूडल बनाकर दी श्रद्धांजलि

सोराबजी का जन्म एक पारसी परिवार में हुआ. सोराबजी के नाम कई उपलब्धियां हैं. वह बंबई विविद्यालय से स्नातक करने वाली पहली महिला हैं. उन्हें ऑक्सफोर्ड विविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने वाली पहली महिला होने का गौरव प्राप्त है. इसके साथ ही वह किसी भी ब्रिटिश विविद्यालय में पढ़ाई करने वाली पहली भारतीय नागरिक हैं.

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भारत की पहली महिला बैरिस्टर भारत की पहली महिला बैरिस्टर

केशवानंद धर दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 15 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 12:00 PM IST

भारत की पहली महिला बैरिस्टर होने का गौरव हासिल करने वाली कॉर्नेलिया सोराबजी की 151वीं जयंती है. इस मौके पर गूगल ने शानदार डूडल बनाकर उन्हें याद किया.

डूडल में एक अदालत का फोटो दिखाई दे रहा है जिसके आगे सोराबजी की वकील की पोशाक पहने हुए तस्वीर दिखाई दे रही है. डूडल पर क्लिक करने पर यूट्यूब पर उनकी एक वीडियो दिखाई देती है जिसमें उनके जीवन के बारे में बताया गया है.

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सोराबजी के नाम कई उपलब्धियां

सोराबजी का जन्म एक पारसी परिवार में हुआ. सोराबजी के नाम कई उपलब्धियां हैं. वह बंबई विविद्यालय से स्नातक करने वाली पहली महिला हैं. उन्हें ऑक्सफोर्ड विविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने वाली पहली महिला होने का गौरव प्राप्त है. इसके साथ ही वह किसी भी ब्रिटिश विविद्यालय में पढ़ाई करने वाली पहली भारतीय नागरिक हैं. उन्होंने कई चुनौतियों का सामना करते हुए भारत में पहली महिला वकील होने का गौरव हासिल किया.

माता-पिता ने निभाई अहम भूमिका

वर्ष 2012 में लंदन में लिंकन इन में उनकी आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया गया. 15 नवंबर 1866 में पैदा हुईं सोराबजी के पिता एक मिशनरी थे. उन्होंने दावा किया कि बंबई विविद्यालय को एक महिला को डिग्री कार्यक्रम में दाखिला देने के लिए मनाने में उनके पिता की अहम भूमिका थी. सोराबजी की मां एक प्रभावशाली महिला थीं और उन्होंने कई सामाजिक कार्यों में हिस्सा लिया. उन्होंने पुणे में कई गर्ल्स स्कूल खोले. सोराबजी के कई शैक्षिक और करियर संबंधी फैसलों पर उनकी मां का प्रभाव रहा. सोराबजी का छह जुलाई 1954 को देहांत हो गया.

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