श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती विशेष: 'मेरे पुत्र की मृत्यु भारत माता के पुत्र की मृत्यु है'

वर्ष 1901 में आज ही के दिन पश्चिम बंगाल की राजधानी कलकत्ता में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ था. 1977 में भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हुआ. जनता पार्टी सत्ता में आई लेकिन आपसी मतभेद इस कदर बढ़ी की 2 साल बाद ही 1979 में जनता पार्टी की सरकार गिर गई और इसके बाद 1980 में जिस पार्टी का जन्म हुआ उसका नाम था- भारतीय जनता पार्टी.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

विकास कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 12:06 PM IST

वर्ष 1901 में आज ही के दिन पश्चिम बंगाल की राजधानी कलकत्ता में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ था. 1977 में भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हुआ. जनता पार्टी सत्ता में आई लेकिन आपसी मतभेद इस कदर बढ़ी की 2 साल बाद ही 1979 में  सरकार गिर गई और इसके बाद 1980 में जिस पार्टी का जन्म हुआ उसका नाम था- भारतीय जनता पार्टी.

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता सर आशुतोष मुखर्जी बंगाल के एक जानेमाने व्यक्ति थे इसलिए यह माना जा सकता है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बचपन किसी भी तरह के अभाव से मुक्त रहा होगा. कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक और इंग्लैंड से बैरिस्टरी पास करने के बाद श्री मुखर्जी 33 वर्ष की आयु में उसी कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए जहां से उन्होंने स्नातक किया था.

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राजनीतिक जीवन की शुरूआत तो कांग्रेस के साथ ही हुई लेकिन बहुत दिनों तक उनकी और कांग्रेस की जमी नहीं. कांग्रेस प्रत्याशी और कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें  बंगाल विधान परिषद का सदस्य चुना गया किन्तु कांग्रेस द्वारा विधायिका के बहिष्कार का निर्णय लेने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. बाद में डॉ मुखर्जी स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और जीत गए.

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जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में पहली सरकार बनी तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक बार फिर कांग्रेस के साथ आए. वो सरकार में मंत्री बने. लेकिन जब नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच समझौता हुआ तो उन्होंने 6 अप्रैल 1950 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और जनसंघ की स्थापना की.

इसके बाद एक दिलचस्प वाकया हुआ जिसमें जवाहरलाल नेहरू को भरी संसद में श्यामा प्रसाद मुखर्जी से माफी मांगनी पड़ी.

इस वाकये के बारे में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पूर्व संपादक इंदर मल्होत्रा ने बीबीसी हिंदी को बताते हैं, 'आम चुनाव के फौरन बाद दिल्ली के नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के सामने जनसंघ एक बड़ी चुनौती के रूप में था. इस माहौल में संसद में बोलते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि वो चुनाव जीतने के लिए वाइन और मनी का इस्तेमाल कर रही है.' इस आरोप का नेहरू ने कड़ा विरोध किया लेकिन विरोध करते वक्त उनसे एक गलती हो गई. इंदर मल्होत्रा बताते हैं, ' जवाहरलाल नेहरू समझे कि मुखर्जी ने वाइन और वुमेन कहा है. उन्होंने खड़े होकर इसका बहुत ज़ोर से विरोध किया. मुखर्जी साहब ने कहा कि आप आधिकारिक रिकॉर्ड उठा कर देख लीजिए कि मैंने क्या कहा है. ज्यों ही नेहरू ने महसूस किया कि उन्होंने ग़लती कर दी. उन्होंने भरे सदन में खड़े हो कर उनसे माफ़ी मांगी. तब मुखर्जी ने उनसे कहा कि माफ़ी मांगने की कोई ज़रूरत नहीं है. मैं बस यह कहना चाहता हूँ कि मैं ग़लतबयानी नहीं करूंगा.’

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डॉ मुखर्जी कश्मीर को धारा 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के भी खिलाफ थे. उन्होंने इसके विरोधस्वरूप ही 11 मई 1953 को बिना परमिट कश्मीर में प्रवेश करने की कोशिश की जहां उन्हें गिरफ्तर कर लिया गया. गिरफ्तारी के दौरान ही 23 जून 1953 को उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई.

अपने बेटे के मृत्यु की खबर सुनने के बाद डॉ मुखर्जी की मां योगमाया देबी ने कहा था-

'मेरे पुत्र की मृत्यु भारत माता के पुत्र की मृत्यु है.'

 

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