क्राइम करने वाले अपराधी बच न सकें, इसके लिए गृह मंत्रालय ने फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है. देश के 13 राज्यों में डीएनए की प्रयोगशाला खुलने जा रही है. इसके लिए केंद्र सरकार ने 131.09 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं. राज्यों में डीएनए जांच की सुविधा होने से खासतौर से दुष्कर्म करने वाले अपराधियों का बचना नामुमकिन होगा. राज्य स्तर पर प्रयोगशाल मौजूद होने से सैंपल्स की जल्द जांच हो सकेगी, जिससे अपराधियों के गिरेबान तक पुलिस के हाथ आसानी से पहुंच सकेंगे.
गृह मंत्रालय ने बताया है कि देश में अपराधों की तेज गति से जांच हो यह तभी संभव होगा, जब फोरेंसिक सबूतों के रखरखाव की उचित व्यवस्था हो. गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने 15 जुलाई को लोकसभा में बताया कि भोपाल और गुवाहाटी की केंद्रीय न्यायायलिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (सीएफएसएल) का आधुनिकीरण किया गया है.
पुणे में भी प्रयोगशाला के आधुनिकीकरण का कार्य पूरा हो गया है. इसके अलावा चंडीगढ़ सीएफफएसएल में 99.76 करोड़ रुपये की लागत से डीएनए विश्लेषण इकाई की स्थापना चल रही है.
उन्होंने बताया कि लोक नायक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय अपराधशास्त्र एवं विधि विज्ञान की ओर से आयोजित अखिल भारतीय फॉरेंसिक एप्टीट्यूट एंड कैलिबर टेस्ट के जरिए केंद्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए 140 फॉरेंसिक भर्ती किए गए हैं. ताकि आपराधिक मामलों की जांच में फोरेंसिक सबूतों का सही से इस्तेमाल हो सके.
गृह मंत्री ने बताया कि यौन हमलों से जुड़े मामलों की जांच में फॉरेंसिक सबूत बेहद अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में 28 जून 2019 तक 3221 अधिकारियों को फॉरेंसिक सबूतों के रखरखाव से जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया. इस संबंध में दिशा-निर्देशों की अधिसूचना जारी की गई है.
पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो और गृह मंत्रालय ने राज्यों को ओरियंटेशन किट के रूप में 3120 यौन हमला साक्ष्य संग्रहण किट बांटे हैं. दरअसल, बीजेपी सांसद जीएम सिद्धेश्वरा ने 16 जुलाई को लोकसभा में पूछा था- सरकार की ओर से फॉरेंसिक सैंपल्स की जांच में देरी को कम करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं. जिसका गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने जवाब दिया.
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