देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे है. कई कंपनियों ने अपने स्टाफ को ‘वर्क फ्राम होम’ की छूट दे दी है. लोगों के घरों में रहने से सड़कों पर भी चहल-पहल कम हो गई है. दुनिया में कोरोना वायरस का पॉजिटिव केस सबसे पहले चीन के वुहान से रिपोर्ट हुआ.
हालांकि चीन ने कोरोना वायरस के संक्रमण पर कुछ हद तक काबू पा लिया है. अब इसका असर चीन से ज़्यादा यूरोप में देखा जा रहा है. देश की राजधानी दिल्ली में भी स्कूल-कॉलेज बंद करने समेत कई ऐहतियाती कदम उठाए गए हैं.
दिल्ली में नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों से आए बहुत से छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं. इसके अलावा इन राज्यों से रोजगार के सिलसिले में भी बहुत से लोग दिल्ली में रह रहे हैं. इन लोगों को करोना वायरस के खतरे के साथ एक और समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है.
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पूर्वोत्तर के लोगो पर की जा रही छींटाकशी
नॉर्थ-ईस्ट से दिल्ली आकर रह रहे कुछ लोगों का आरोप है कि चीन के लोगों की तरह नैन-नक्श होने की वजह से कोरोना से जोड़कर उन पर छींटाकशी की जा रही है.
दिल्ली के साकेत कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस करने वाली बंदाना का कहना है कि होली पर कुछ लोगों ने उन्हें कोरोना कहकर कमेंट किए.
बंदाना के मुताबिक कुछ लोग नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को चीनी समझते हैं. बंदाना ने कहा कि चीन के लोगों से चेहरा मिलने की वजह से उन्हें पहले भी ऐसे कमेंट सुनने को मिले हैं.
ये अकेली बंदाना की शिकायत नहीं है, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली दो छात्राओं ने भी ऐसा ही दावा किया है. उन्हें भी कोरोना को लेकर ही कमेंट सुनने को मिले.
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टिप्पणी पर हो कार्रवाई
रिकदेन लामा और उनके पार्टनर गौरव स्टूडेंट हैं. गौरव कॉल सेंटर में पार्ट टाइम काम भी करते हैं. दोनों का कहना है कि उनके खिलाफ कॉलेज में कई बार चेहरे-मोहरे की वजह से एक खास शब्द का इस्तेमाल किया जाता रहा है जिसे वे नस्ली और आपत्तिजनक मानते हैं.
नॉर्थ-ईस्ट से ताल्लुक रखने वाली महिला संगीता लिम्बू का कहना है कि कई बार उनके खिलाफ अश्लील कमेंट भी किए गए. ऐसा अब भी होता है.
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दिल्ली में रहने वाले नॉर्थ-ईस्ट के लोग पहले भी ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं. कुछ मामलों में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई भी की. लेकिन नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की मांग है कि इस मामले में सख्त रुख अपनाया जाना चाहिए जिससे कि भविष्य में उन्हें ऐसी टिप्पणियां सुनने को न मिले.
अंकित यादव