लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों के नाम फाइनल होने के बाद सभी प्रत्याशियों ने अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों में जाकर प्रचार शुरू कर दिया है. इसमें कई लोग ऐसे हैं जिन्हें अपने ही लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है.
उत्तराखंड की हरिद्वार सीट को राज्य की प्रमुख सीट माना जाता है. हरिद्वार को धर्मनगरी के नाम से भी जाना जाता है. इस सीट पर सबसे ज्यादा वोटर हैं और पर भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक यहां से प्रत्याशी हैं. भाजपा द्वारा उन्हें टिकट दिए जाने पर, अपने ही विधायक का विरोध झेलना पड़ा. विधायक ने पोखरियाल पर बाहरी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि हरिद्वार की जनता स्थानीय उम्मीदवार चाहती है, जो वहां कि स्थानीय जनता के बीच से हो.
अब कांग्रेस ने भी उनके खिलाफ इसी मुद्दे को हथियार बना लिया. विपक्ष के सवालों का निशंक ने भी करारा जवाब दिया और अपने बाहरी होने के आरोप पर निशंक ने कहा कि ये बात जिसने भी पहले उठाई है, उनकी जमानत जब्त हुई है.
उन्होंने कहा कि 2009 में इसी बात को लेकर विपक्ष चुनाव लड़ा. ये घटिया किस्म के हथकंडे वो लोग उठाते हैं, जिनका न मिशन होता है और न विजन होता है और न ही लोकप्रिय होते हैं. वो सिर्फ अपनी दुकान चलाते हैं. ऐसे निम्न और घटिया सोच के लोगों को जनता इस बार फिर सबक सिखाएगी और जमानत जब्त करवाएगी.
पुर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पहले हरिद्वार से लड़ने और बाद में उनके नैनीताल चले जाने पर भी निशंक ने चुटकी ली और कहा कि वो दिल से चाहते थे कि हरीश रावत हरिद्वार से चुनाव लड़ें, तब उनको भी चुनाव लड़ने का मजा आता क्योंकि हरीश रावत कांग्रेस के बड़े नेता हैं. वहीं पौड़ी सीट से सांसद रहे खंडूरी के पुत्र मनीष खंडूरी कांग्रेस से उम्मीदवार हैं.
जब निशंक से पूछा गया कि क्या खंडूरी खेमा भाजपा के साथ रह पाएगा तो उन्होंने कहा कि खंडूरी जी भाजपा के पौड़ी से सांसद रहे हैं, और खंडूरी ने कहा है कि वो भाजपा के साथ हैं, और मुझे पार्टी ने बहुत कुछ दिया है और मैं अपनी पार्टी का प्रचार करूंगा.
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