शराब पर पाबंदी को लेकर क्या कहता है संविधान, जानिए सुप्रीम कोर्ट के वकील की राय

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा ने बताया कि आर. धनसेकरण बनाम तमिलनाडु सरकार के हालिया मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने भी यह माना कि शराब की बिक्री को रेगुलेट करना पूरी तरह से सरकार की नीति का मामला है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है.

Advertisement
सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

राम कृष्ण

  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2020,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

  • संविधान के अनुच्छेद 47 में है नशीले पदार्थों पर पाबंदी का प्रावधान
  • शराब पर पाबंदी लगाने के लिए सरकार को नहीं कर सकते हैं बाध्य

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान सरकार ने शराब की बिक्री की इजाजत दी, तो शराब की दुकानों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं. लॉकडाउन में शराब की जमकर बिक्री हो रही है. कई राज्यों ने शराब पर काफी टैक्स भी लगा दिया है, लेकिन फिर भी शराब की बिक्री कम नहीं हो रही है.

Advertisement

शराब की बिक्री को लेकर लोगों में मतभेद हैं. कुछ लोग शराब बिक्री के पक्ष में हैं, जबकि कुछ लोग इसकी मुखालफत कर रहे हैं. शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए कुछ लोग अदालत का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं. अब सवाल यह है कि आखिर शराब को लेकर भारतीय संविधान में क्या प्रावधान है?

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 में स्वास्थ्य के लिए नुकसान पहुंचाने वाले मादक पेय (Drinks) पर प्रतिबंध का जिक्र किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट मिश्रा का कहना है कि अनुच्छेद 47 सीधे तौर पर शराब पर पाबंदी नहीं लगाता है, लेकिन इसके लिए सरकार से प्रयास करने के लिए कहता है. इस अनुच्छेद में शराब समेत सभी नशीले पदार्थ पर पाबंदी को सरकार की प्राइमरी ड्यूटी बताया गया है. हालांकि इसको लागू करने के लिए सरकार को बाध्य नहीं किया जा सकता है.

Advertisement

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें

एडवोकेट मिश्रा ने बताया कि सरकार का काम सिर्फ शासन चलाना ही नहीं है, बल्कि लोगों के जीवनस्तर को बेहतर बनाना भी है. एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि कई रिसर्च में यह भी सामने आ चुका है कि थोड़ी शराब पीना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है. हालांकि ज्यादा शराब पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है.

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा ने बताया कि आर. धनसेकरण बनाम तमिलनाडु सरकार के हालिया मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने भी यह माना कि शराब की बिक्री को रेगुलेट करना पूरी तरह से सरकार की नीति का मामला है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है. एडवोकेट मिश्रा का कहना है कि बिहार समेत कई राज्य सरकारें अपने यहां शराब की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगा चुकी हैं.

देश-दुनिया के किस हिस्से में कितना है कोरोना का कहर? यहां क्लिक कर देखें

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement