कोरोना वायरसः DRDO ने बनाया बैगेज को डिसइन्फेक्ट करने वाला कन्वेयर

यह डिसइन्फेक्टर रोलर आधारित है. इस बैगेज डिसइन्फेक्टर को एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, बस अड्डा और सार्वजनिक संस्थानों के गेट में लगाया जा सकता है. इसमें यात्री अपना सामान एक तरफ से डालेंगे, तो दूसरी तरफ से यह डिसइन्फेक्ट होकर निकल आएगा.

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डिसइन्फेक्टर डिसइन्फेक्टर

आशीष पांडेय

  • कोच्चि,
  • 26 जून 2020,
  • अपडेटेड 10:58 PM IST

  • डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी किया ऑनलाइन रिलीज
  • एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और बस अड्डे में लग सकता है

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी ने कोरोना वायरस को खत्म करने वाला कन्वेयर विकसित किया है. यह कन्वेयर बैगेज के डिसइन्फेक्शन के लिए बनाया गया है. यह स्वचालित स्टैंड अलोन सिस्टम हैं, जो अल्ट्रावायलेट (यूवी) के जरिए कुछ सेकंडों में ही बैगेज और अन्य वस्तुओं को डिसइन्फेक्ट कर देता है.

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डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने इस प्रोडक्ट को ऑनलाइन रिलीज किया है. यह डिसइन्फेक्टर रोलर आधारित है. इस बैगेज डिसइन्फेक्टर को एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, बस अड्डा और सार्वजनिक संस्थानों के गेट में लगाया जा सकता है. इसमें यात्री अपना सामान एक तरफ से डालेंगे, तो दूसरी तरफ से यह डिसइन्फेक्ट होकर निकल आएगा.

इससे यात्रियों को सहूलियत होगी और सैनिटाइज में की जरूरत नहीं होगी. साथ ही कोरोना का खतरा भी कम होगा. नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी ने हैदराबाद स्थित अपोलो माइक्रोसिस्टम्स लिमिटेड के साथ मिलकर इसको विकसित किया है.

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आपको बता दें कि चीन के वुहान से फैले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया है. इस जानलेवा वायरस को फैलने से रोकने के लिए पहले लॉकडाउन किया गया, लेकिन अब तक वैक्सीन नहीं बन पाई है और लोगों को धीरे-धीरे अनलॉक की ओर बढ़ना पड़ रहा है. ऐसे में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग के पालन करने पर जोर दिया जा रहा है.

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वहीं, भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. हिंदुस्तान में कोरोना वायरस के मरीजों का आंकड़ा पांच लाख के पार पहुंच गया है, जिनमें से 15 हजार 300 से ज्यादा लोग दम तोड़ चुके हैं. इसके साथ ही 2 लाख 85 हजार 635 से ज्यादा लोग इलाज से ठीक भी हो चुके हैं, जिनको अस्पताल से डिस्चार्ज भी किया जा चुका है.

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