ऑनलाइन लर्निंग 3% से हुई 100 फीसदी, यही भविष्य है: अनंत अग्रवाल

ऑनलाइन लर्निंग के इस दौर में इंडिया टुडे के शो न्यूजट्रैक में क्लाउड रिडिफाइनिंग द क्लासरूम पर चर्चा की गई. ऑनलाइन एजुकेशन कैसे बदल रहा है और इसका क्या असर पड़ रहा है, इसपर edx के सीईओ प्रो अनंत अग्रवाल, Coursera के सीईओ जेफ मैगियोन्क्लेडा और दिल्ली के वंसत वैली स्कूल की प्रिंसिपल रेखा कृष्णन ने अपनी बात रखी.

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कोरोना वायरस के दौर में छात्रों की हो रही ऑनलाइन क्लासेस (फाइल फोटो) कोरोना वायरस के दौर में छात्रों की हो रही ऑनलाइन क्लासेस (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 12:07 AM IST

  • 1 महीने में लोगों की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई: अनंत अग्रवाल
  • क्लासरूम की पढ़ाई की जगह कोई नहीं ले सकता: रेखा कृष्णन

कोरोना वायरस के इस दौर में छात्रों के लिए ये पूरी नई दुनिया है. लॉकडाउन और घर में बंद होने के कारण ज्यादातर अब वर्चुअल दुनिया की ओर देख रहे हैं. और जब स्कूल और कॉलेज बंद हैं तो इसका मतलब है ऑनलाइन ही सब कुछ सीखना है. आमतौर पर छात्रों से गुलजार रहने वाले स्कूल अब सुनसान हो गए हैं. और अब आनलाइन क्सासेस हो रही हैं. ऑनलाइन लर्निंग के इस दौर में इंडिया टुडे के शो न्यूजट्रैक में 'क्लाउड रिडिफाइनिंग द क्लासरूम' पर चर्चा की गई. ऑनलाइन एजुकेशन कैसे बदल रहा है और इसका क्या असर पड़ रहा है, इसपर edx के सीईओ प्रो अनंत अग्रवाल, Coursera के सीईओ जेफ मैगियोन्क्लेडा और दिल्ली के वंसत वैली स्कूल की प्रिंसिपल रेखा कृष्णन ने अपनी बात रखी.

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इंडिया टुडे और आजतक के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने अनंत अग्रवाल से जानना चाहा कि लॉकडाउन के दौरान ग्लोबल और भारत के लेवल पर ऑनलाइन एजुकेशन में उन्होंने क्या ट्रेंड देखा. इसपर अनंत अग्रवाल ने कहा कि पिछले एक महीने में सभी लोगों के लिए जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है. 15 मार्च के पहले दुनिया की 3 फीसदी आबादी ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रही थी, और 15 मार्च के बाद 100 फीसदी दुनिया ऑनलाइन की ओर बढ़ गई. ये बहुत बड़ा बदलाव है नई तकनीक का.

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उन्होंने कहा कि edx के लिए ट्रैफिक ग्लोबली 10 के फैक्टर के साथ बढ़ा है. 900 फीसदी ट्रैफिक मार्च के महीने में रहा. भारत और भी ऊपर की ओर है. हमारा ट्रैफिक 1000 फीसदी बढ़ा है. हर कोई ऑनलाइन की ओर बढ़ रहा है. ये क्लास में एक घंटे तक बैठ के पढ़ने से काफी अलग है.अनंत अग्रवाल ने आगे कहा कि लोगों को अभी ऑनलाइन लर्निंग का ज्यादा अनुभव नहीं है. लेकिन हमें मानना होगा कि ऑनलाइन लर्निंग ही भविष्य है. और आने वाले दिन में ये एक नया नॉर्मल होगा.

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वहीं जेफ मैगियोन्क्लेडा ने कहा कि आमने-सामने जो चीज होती हैं वो ज्यादा बेहतर होती हैं इसमें कोई शक नहीं है. मेरी बेटी है वो अपने दोस्तों को मिस करती है. टीचर्स को मिस करती है. छोटे बच्चों के लिए समाजिक होना ज्यादा जरूरी है.

आप ऑनलाइन एजुकेशन से कितना संतुष्ट हैं और क्या फर्क देख रही हैं आप?

वसंत वैली स्कूल की प्रिंसिपल रेखा कृष्णन ने कहा कि जिस तरह से कोरोना का प्रकोप है और अगले कुछ महीनों तक इसके देश में रहने आशंका है और ऐसे में ऑनलाइन लर्निंग अहम हो जाती है, क्योंकि इससे बच्चा घर बैठे भी सीख सकता है. लेकिन ये क्लासरूम की पढ़ाई से एकदम अलग होती है. ऐसा मैं सोचती हूं. शिक्षक और छात्र के बीच में संबंध जरूरी है. लेकिन अभी हम ऐसा नहीं कर सकते हैं तो इस समय ये एक बेहतर ऑप्शन है. ये बढ़िया ऑप्शन है. जो भी चुनौतियों का हम सामना कर रहे हैं उसमें शिक्षक, छात्र, अभिभावक ने अच्छा काम किया है. मैं काफी संतुष्ट हूं जिस तरह से हमने सीखा है. शिक्षकों के सामने कई सारी चुनौतियां थीं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने चुनौतियों को स्वीकारा है, उससे मुझे गर्व है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुझे लगता है ऑनलाइन ही लर्निंग का भविष्य होगा, लेकिन स्कूल में जाकर पढ़ना अलग ही होता है. स्कूल में दोस्तों के साथ जो बातें होती हैं वो सब एक यादें हो जाती हैं. ऑनलाइन एजुकेशन के फायदे हैं इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन स्कूल में छात्र और शिक्षक के बीच में जो भावनात्मक जुड़ाव होता है उसे हम किसी से छीन नहीं सकते.

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लॉकडाउन के पहले ही शुरू हुई वर्चुअल क्लास

लॉकडाउन लागू होने से पहले कुछ स्कूलों ने पहले ही ऑनलाइन लर्निंग के तरीके को अपना लिया था. दिल्ली का वसंत वैली स्कूल भी देश में सबसे पहले कक्षा 6 और उससे ऊपर के छात्रों के लिए वर्चुअल क्लास की शुरुआत करने वाले स्कूल में रहा. वंसत वैली स्कूल की प्रिंसिपल रेखा कृष्णन ने कहा कि पिछले साल जब प्रदूषण के कारण स्कूलों को दिल्ली में बंद करना पड़ा था, तब हमने सोचा कि हमें बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए. लेकिन तब बस कुछ दिन के लिए ही स्कूल बंद हुए थे. और हमें तकनीकी तौर पर ज्यादा जानकारी नहीं थी. लेकिन इस बार जब कोरोना के कारण स्कूल बंद हुए, हम जानते थे कि हमें अपने बच्चों को सीखने में मदद करने के लिए कुछ करना होगा.

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