नरेंद्र मोदी सरकार को यह नहीं पता है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए कितने शरणार्थियों ने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया है. गृह मंत्रालय ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में इसका खुलासा किया है.
सरकार ने कहा कि नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों का डाटा सरकार के पास उपलब्ध नहीं है. सरकार ने नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों की संख्या की जानकारी नहीं होने का खुलासा उस समय किया है, जब देश में नागरिकता को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन चल रहा है.
नागरिकता से जुड़ा मुकम्मल डाटा सरकार के पास नहीं
सरकार के इस जवाब से उसके इस दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए लाखों शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन कानून से फायदा होगा. गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में कहा था कि इससे इन देशों से आए लाखों लोगों को भारत की नागरिकता मिलेगी.
RTI का सरकार ने नहीं दिया जवाब
एक RTI के जवाब में गृह मंत्रालय के विदेश विभाग की नागरिकता शाखा ने कहा कि नागरिकता कानून 1955 के प्रावधानों के तहत नागरिकता का आवेदन देने वालों का रिकॉर्ड रखने की जरूरत नहीं है.
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बता दें कि चंडीगढ़ के आरटीआई एक्टिविस्ट दिनेश चड्ढा ने गृह मंत्रालय से पूछा था कि दूसरे देशों के कितने लोगों ने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन दे रखा है. उन्होंने इन आवदेकों का धर्म और देश की जानकारी भी मांगी थी. आरटीआई में इस बारे में भी सूचना मांगी गई थी कि हिन्दू, मुस्लिम, जैन और दूसरे धर्म के लोग जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हैं, ऐसे कितने लोगों ने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया है.
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इंडिया टुडे से बात करते हुए दिनेश चड्ढा ने हैरानी जताई कि गृह मंत्रालय ने नागरिकता से जुड़े उनके सवालों का जवाब नहीं दिया है. उन्होंने कहा, "मैं जानना चाहता था कि ऐसे कितने शरणार्थियों को CAA से लाभ पहुंचेगा."
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि CAA जैसे अहम कानून को लाने से पहले भारत सरकार ने मुकम्मल तैयारी नहीं की. बता दें कि हाल ही में कोलकाता रैली में भी अमित शाह ने दावा किया था कि CAA से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए लाखों हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध धर्मावलंबियों को फायदा पहुंचेगा.
आनंद पटेल