गंगा सफाई पर मोदी सरकार ने खड़े किए हाथ? कॉरपोरेट और आम जनता पर छोड़ा जिम्मा

ऐसे में तीन साल से ज्यादा होने के बावजूद गंगा नदी की सफाई को लेकर खास प्रगति नहीं होने पर नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक योजना बनाई है. इस योजना के तहत अब सरकार कॉरपोरेट और आम जनता को गंगा नदी की सफाई के लिए आगे आने को कहेगी.

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गंगा नदी सफाई अभ‍ियान गंगा नदी सफाई अभ‍ियान

अंकुर कुमार / हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 11 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 10:11 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा नदी की सफाई पर केंद्र सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं. लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि सरकार बनने के बाद गंगा नदी की सफ़ाई करवा दी जाएगी. हालांकि नमामि गंगे के नाम से अलग विभाग बनने के बाद भी यह काम पूरा नहीं हो सका है. यही वजह है कि पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार जल्द कॉरपोरेट और आम लोगों को गंगा नदी की सफाई के लिए आगे आने के लिए कहेगी.

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आपको बता दें कि 2014 सरकार में सरकार बनने बाद पीएम मोदी ने जलसंसाधन मंत्रालय के तहत नमामि गंगे नाम से अलग विभाग भी बनाया. साथ ही मंत्री उमा भारती को इस विभाग का जिम्मा सौंपा. उमा भारती ने भी घोषणा की थी कि गंगा को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करना और गंगा सफ़ाई उनके जीवन का सबसे बड़ा मकसद है. हालांकि पीएम मोदी उमा भारती के तीन साल के काम से संतुष्ट नहीं हुए और उन्हें कैबिनेट विस्तार में जल संसाधन मंत्रालय से हाथ धोना पड़ा.

ऐसे में तीन साल से ज्यादा होने के बावजूद गंगा नदी की सफाई को लेकर खास प्रगति नहीं होने पर नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक योजना बनाई है. इस योजना के तहत अब सरकार कॉरपोरेट और आम जनता को गंगा नदी की सफाई के लिए आगे आने को कहेगी. केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने एक प्रपोज़ल तैयार किया हैं. इसके तहत सरकार गंगा किनारे नए घाट बनाने, पुराने घाटों की साफ-सफाई और मरम्मत करने, गंगा किनारे बने श्मशान गृहों की मरम्मत, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, नदी की सतह की सफाई, वृक्षारोपण और गंगा किनारे जन-सुविधाओं के लिए कॉरपोरेट सेक्टर और आम जनता से आगे आने को कह रही है.

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इसके तहत कॉरपोरेट सेक्टर से कहा जाएगा कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत गंगा की सफाई के काम के लिए आगे आए. इसके लिए बकायदा हर घाट की सफाई/मरम्मत, वृक्षारोपण समेत तमाम कार्यों के लिए अनुमानित खर्च की सीमा तय करके वेबसाइट पर डाला गया है जो कुछ लाख से लेकर करोंड़ों रुपये तक है.

मंत्रालय ने गंगा में अपनी वेबसाइट में जिन पांच राज्यों से गंगा हो कर गुज़रती हैं वहाँ पर ज़रूरत के हिसाब से गंगा नदी पर नए 74 घाटों को बनाने और पुनः निर्माण की जानकारी दी है. साथ ही गंगा सफ़ाई के लिए 220 पुराने घाटों की जानकारी दी गई है. इसके साथ ही गंगा पर श्मशान घाटों को बनाने और उनके पुनः निर्माण के लिए कॉरपोरेट सेक्टर और आम जनता से आगे आने के लिए कहा गया है.

इस योजना के तहत गेंगा नदी की सफाई में मदद करने वालों को जल संसाधन मंत्रालय पीएम मोदी से सम्मानित भी कराएगा. आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में डेढ़ साल का वक्त बचा है और सरकार को चिंता है कि तब जनता गंगा सफाई को लेकर सरकार की तरफ से किए गए तमाम दावों का हिसाब मांगेगी.

74 नए घाटों के निर्माण, पुनः निर्माण की राज्यवार लिस्ट इस प्रकार है:

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उतराखंड : 15

उतर प्रदेश : 45

बिहार : 5

झारखंड : 3

पश्चिम बंगाल :6

224 पुराने घाटों की सफ़ाई राज्यवार लिस्ट इस प्रकार है :

उतराखंड : 72

उतर प्रदेश : 123

बिहार : 20

पश्चिम बंगाल :5

74 श्मशान घाटों के निर्माण और पुनः निर्माण की राज्यवार लिस्ट इस प्रकार है:

उतराखंड : 15

उतर प्रदेश : 30

बिहार : 2

पश्चिम बंगाल :2

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