नानाजी देशमुख को मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया है. समाजसेवी नानाजी देशमुख का जन्म महाराष्ट्र के कडोली में 11 अक्टूबर सन 1916 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उन्हें भारत सरकार ने सामाजिक कार्यों के लिए 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था. 1940 में आरएसएस के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार के निधन के बाद नानाजी देशमुख ने अपना पूरा जीवन संघ के नाम कर दिया.
आज देश भर में सरस्वती शिशु मन्दिर नामक स्कूलों की स्थापना नानाजी देशमुख ने पहली बार गोरखपुर में की थी. उन्होंने ही 1947 में आरएसएस की पाञ्चजन्य पत्रिका निकालने की शुरुआत का श्रेय भी उन्हें ही जाता है. नानाजी ने 1957 तक उत्तर प्रदेश के हर जिले में जनसंघ की इकाइयां स्थापित कर दीं. वह जनता पार्टी के संस्थापकों में नानाजी देशमुख प्रमुख थे. आपातकाल हटने के बाद जब चुनाव हुआ तो नानाजी देशमुख यूपी के बलरामपुर से लोकसभा सांसद चुने गए.
राजनीतिक जीवन से लिया संन्यास
1960 में लगभग 60 वर्ष की उम्र में नानाजी ने राजनीतिक जीवन से संन्यास लेते हुए सामाजिक जीवन में पदार्पण किया. 1989 में भारत भ्रमण के दौरान नानाजी पहली बार भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट आए और अंतिम रूप से यहीं बस गए. नानाजी ने अपने मृत शरीर को मेडिकल शोध के लिए दान करने का वसीयतनामा निधन से काफी पहले 1997 में ही लिखकर दे दिया था. उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के 500 से अधिक गांवों में सामाजिक कार्यक्रम चलाए. उन्होंने मंथन (आत्मनिरीक्षण) पत्रिका भी प्रकाशित की, जिसका कई वर्षों तक केआर मलकानी ने संपादन किया. देशमुख ने गोंडा (यूपी) और बीड (महाराष्ट्र) में बहुत सारे सामाजिक कार्य किए. उनकी परियोजना का आदर्श वाक्य था: "हर हाथ को देंगे काम, हर खेत को देंगे पानी"
राम की कर्मभूमि में लिया संकल्प
1969 में देशमुख पहली बार चित्रकूट आए थे. इस स्थान पर राम ने 14 वर्षों में से 12 वर्ष निर्वासन में बिताए थे. उन्होंने राम की कर्मभूमि में समाज की दयनीय स्थिति को देखा. नानाजी देशमुख ने पवित्र नदी मंदाकिनी के पास बैठकर चित्रकूट का चेहरा बदलने का संकल्प लिया. उन्होंने चित्रकूट में चित्रकूट ग्रामोदय विश्व विद्यालय की स्थापना की, जो भारत का पहला ग्रामीण विश्वविद्यालय था.
देहांत के बाद एम्स को दे दिया गया था पार्थिव शरीर
27 फरवरी 2010 को नानाजी देशमुख का देहांत चित्रकूट में हुआ और उनकी इच्छा के अनुसार उनकी पार्थिक देह एम्स को सौंप दी गई.
पांच लोगों को मोदी सरकार ने दिया भारत रत्न
मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में अब तक 5 लोगों को भारत रत्न के सम्मान से नवाजा है. 2015 में महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिया गया था. इसके बाद मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के इस आखिरी साल में तीन हस्तियों को भारत रत्न से नवाजा है. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, समाज सुधारक नानाजी देशमुख और महान गायक, संगीतज्ञ और फिल्मकार भूपेन हजारिका इस सम्मान के लिए चुने गए हैं.
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