बेंगलुरु को पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित शहरों में माना जाता रहा है, लेकिन अब दुर्भाग्यपूर्ण रूप से वहां की हवा भी बेहद प्रदूषित होती जा रही है. हाल में जारी एक स्टडी के अनुसार शहर के छह स्थानों पर करीब आठ साल तक मापी गई हवा की गुणवत्ता से यह खुलासा हुआ है कि वहां सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा तो घट रही है, लेकिन एपीएम यानी एयरबोर्न पार्टिकुलेट मैटर 'ऊंचे' या 'जोखिमपूर्ण' स्तर तक पहुंच गया है.
बेंगलुरु मिरर की खबर के अनुसार यह स्टडी औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और कई संवदेनशील इलाकों में की गई है. साल 2006 से 2013 के बीच प्रदूषण के ट्रेंड पर जारी इस विश्लेषण के अनुसार शहर के केएचबी इंडस्ट्रियल इलाके में एपीएम 216 फीसदी तक पहुंच गया है, तो एएमसीओ बैटरीज के इलाके में 161.2 फीसदी, विक्टोरिया हॉस्पिटल इलाके में 119.3 फीसदी, वाईपीआर यानी यशवंतपुर पुलिस स्टेशन इलाके में 80.3 फीसदी और ग्रेफाइट इंडिया के इलाके में 76.5 फीसदी तक पहुंच गया है.
वाहनों से बढ़ रहा प्रदूषण
जानकारों के अनुसार शहर में वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या इस प्रदूषण की मुख्य वजह है. शहर के प्रदूषण में करीब 50 फीसदी योगदान वाहनों का ही है. इसके अलावा निर्माण गतिविधियों, सड़कों की धूल, घरेलू प्रदूषण, डीजल जेनरेटर का बढ़ता इस्तेमाल प्रदूषण के अन्य कारकों में से हैं. जिन सभी छह इलाकों में स्टडी की गई, उनमें बेहद नुकसानदेह माने जाने वाले पीएम 10 (10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले पार्टिकुलेट मैटर) का स्तर साल 2013 में जोखिमपूर्ण पाया गया. पार्टिकुलेट मैटर को दूसरे प्रदूषकों के मुकाबले मानव सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदेह माना जाता है और इसकी वजह से कई बीमारियां होती हैं.
दिनेश अग्रहरि