BCCI की बम्पर टाइटल राइट्स डील पर विवाद का साया?

Ebix से जब इंडिया टुडे ने संपर्क करने की कोशिश की तो कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. लेकिन समझा जाता है कि उन्होंने जब राइट्स के लिए बोली लगाई तो वो कोई भी हितों का टकराव नहीं होने को लेकर आश्वस्त थे.

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बीसीसीआई (फोटो-फाइल फोटो) बीसीसीआई (फोटो-फाइल फोटो)

रसेश मंडानी

  • मुंबई,
  • 22 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 10:07 PM IST

भारतीय क्रिकेट के सर्वेसर्वा BCCI ने बुधवार को 2019-23 सीजन चक्र के लिए टाइटल राइट्स को लेकर Paytm के साथ फिर करार होने की जानकारी दी. BCCI  की विज्ञप्ति में करार की रकम में 58% के इजाफे के बारे में भी बताया गया. लेकिन अब सामने आया है कि राइट्स अवार्ड किए जाने की प्रक्रिया विवाद से अछूती नहीं रही.  

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सूत्रों के मुताबिक राइट्स हासिल करने की इच्छुक तीन पार्टियों में शामिल Ebix की बोली Paytm की स्वीकार की गई बोली 326.8 करोड़ रुपए के काफी करीब थी. अगर Ebix की बोली को अमान्य करार नहीं दिया जाता तो BCCI को ई-ऑक्शन का सहारा लेना पड़ता. Ebix एक ई-कॉमर्स कंपनी है. उसे बोली से इसलिए अयोग्य करार दिया गया क्योंकि उन्हें जो एजेंसी स्पोर्टी सोल्यूशन्ज बोली में मदद दे रही थी वो एम-जंक्शन की सहयोगी है. वहीं एम-जंक्शन BCCI की ऑक्शन पार्टनर है.

Ebix से जब इंडिया टुडे ने संपर्क करने की कोशिश की तो कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. लेकिन समझा जाता है कि उन्होंने जब राइट्स के लिए बोली लगाई तो वो कोई भी हितों का टकराव नहीं होने को लेकर आश्वस्त थे.

BCCI के एक अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया, 'अगर राइट्स दिए जाने में किसी तरह का भाई-भतीजावाद हुआ है तो सवाल जरूर उठाया जाना चाहिए. अगर Ebix  अयोग्य थी कैसे उन्हें तकनीकी निविदा के दौरान मस्टर को पास कर लिया. और फिर कैसे एम-जंक्शन को प्रक्रिया को पूरा करने की अनुमति दी गई. अगर उनके हितों का टकराव स्पोर्टी सोल्यूशन्ज से पार्टनरशिप की वजह से होता था.'

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समझा जाता है कि ये मुद्दा BCCI की प्रशासकों की कमेटी (COA) की मेज तक बुधवार को विजेता बोली के एलान से पहले तक पहुंचा था. जब Ebix को अयोग्य ठहराया गया था तो BCCI अधिकारियों ने COA को लिखित सूचना दी थी.

एक इनसाइडर ने इंडिया टुडे को बताया, 'COA के एक सदस्य ने आंतरिक संवाद में ये सवाल उठाया था कि कैसे प्रक्रिया को जारी रखा जा सकता है जब BCCI के ऑक्शन पार्टनर एम-जंक्शन के हितों का टकराव संज्ञान में था. लेकिन तीन सदस्यीय COA में बहुमत की राय थी कि आखिरी स्टेज में इस तरह का कोई भी कदम BCCI के लिए आर्थिक तौर पर नुकसानदेह साबित होगा.'

बोली के विवाद ने BCCI के ई-ऑक्शन का रास्ता नहीं अपनाए जाने के फैसले को भी फोकस में ला दिया है. ये फैसला लिया गया कि जब वित्तीय निविदाओं को खोला जाएगा तो अगर बोली का मूल्य एक दूसरे से 10 फीसदी के अंतर पर होगा तभी ई-ऑक्शन की ज़रूरत पड़ेगी. राइट्स के लिए बोली लगाने वाली तीसरी कंपनी ड्रीम 11 थी लेकिन उसकी बोली विजेता बोली से काफी कम थी. 

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