असम सरकार का फैसला, असमिया को मिलेगा राज्यभाषा का दर्जा, लैंड राइट के लिए बनेगा कानून

राज्य सरकार के कैबिनेट के फैसले की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कहा कि भाषा को अनिवार्य करने संबंधी यह कानून पहाड़ी जिलों, BTAD, बोडो बहुल इलाकों और बराक घाटी में लागू नहीं होगा.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

aajtak.in

  • गुवाहाटी,
  • 21 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:40 PM IST

  • असम सरकार केंद्र सरकार से करेगी सिफारिश
  • संविधान के अनुच्छेद 345 में किया जाए संशोधन

असमी भाषा, संस्कृति, विरासत और जमीनें बचाने के लिए एक तरफ असम के कई संगठनों ने अपना विरोध तेज कर दिया है. दूसरी तरफ असम सरकार ने असमिया भाषा को राज्य की आधिकारिक भाषा घोषित करने की योजना बनाई है. बीजेपी की अगुवाई वाली शनिवार को निर्णय लिया है कि असम के मूल निवासियों की भाषा, जमीन पर अधिकार आदि की सुरक्षा को लेकर योजनाएं लाई जाएंगी.  

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अनुच्छेद 345 में संशोधन?

असम सरकार के मंत्रिमंडल ने शनिवार को ​फैसला किया है कि असम सरकार केंद्र सरकार से सिफारिश करेगी कि संविधान के अनुच्छेद 345 में संशोधन करके असमिया को बराक घाटी, BTAD इलाकों और पहाड़ी जिलों समेत असम की राज्य भाषा घोषित किया जाए. कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि राज्य सरकार कानून बनाएगी जिसके तहत राज्य के सभी स्कूलों में 10वीं तक असमिया भाषा अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाई जाएगी.

राज्य सरकार के कैबिनेट के फैसले की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कहा कि भाषा को अनिवार्य करने संबंधी यह कानून पहाड़ी जिलों, BTAD, बोडो बहुल इलाकों और बराक घाटी में लागू नहीं होगा. उन्होंने कहा, राज्य सरकार विधानसभा के अगले सत्र में असम के मूल निवासियों के जमीन के अधिकार जुड़ा एक नया विधेयक लाएगी.

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अधिकार की होगी सुरक्षा

हेमंत बिस्व सरमा ने कहा, 'इस नए बिल के तहत स्थानीय लोग अपनी जमीनें सिर्फ स्थानीय लोगों को ही बेच सकेंगे. इस तरह मूल निवासी समुदाय की जमीनें समुदाय से बाहर नहीं जाएंगी और यह विधेयक इस समुदाय के जमीन के अधिकार की पूरी सुरक्षा करेगा.'

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अगले सत्र में एक और विधेयक लाएगी जो राज्य की धरोहरों को सुरक्षा प्रदान करेगा. मंत्री ने कहा, 'सत्रास, मठ और अन्य विरासत केंद्र की जमीनों पर अतिक्रमण को अपराध माना जाएगा और यह दंडनीय होगा.'

सरमा ने कहा कि 'राज्य मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय लिया कि सभी छह जनजातीय स्वायत्त परिषदों को संवैधानिक दर्जा दिया जा सकता है ताकि वे केंद्र और राज्य सरकारों दोनों से विशेषाधिकारों के साथ फंड भी प्राप्त कर सकें. सभी जनजातीय स्वायत्त परिषदों के मुख्य कार्यकारी सदस्य सब-डिवीजनों के सब-डिवीजन लैंड एडवाइजरी कमेटी के सदस्य होंगे.'

जनजातीय समुदायों को आरक्षण

राज्य मंत्रिमंडल ने तीन और समुदायों जैसे कोच राजबोंगशी, मोरन और मटक के लिए तीन नई स्वायत्त परिषद बनाने का भी फैसला किया है. विश्वविद्यालयों में मेडिकल, इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर और वेटनरी साइंस में कुछ जनजातीय समुदायों को आरक्षण की भी व्यवस्था होगी. परिवार कल्याण मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, ​कृषि विभाग और पशुपालन व पशु चिकित्सा विभाग में समुदायों की जनसंख्या को देखते हुए सीटों का बंटवारा किया जाएगा.

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राज्य की कैबिनेट ने असम टी कॉरपोरेशन में कामगारों की तनख्वाह बढ़ाने का भी फैसला किया है. ब्रह्मपुत्र घाटी में मजदूरी 137 रुपये से बढ़ाकर 167 रुपये प्रतिदिन की जाएगी और बराक घाटी में यह 115 रुपये से बढ़ाकर 145 रुपये की जाएगी.

अगले तीन महीनों में चाय बागान वाले इलाकों में 100 नये हाईस्कूल करने की भी योजना है. गोलाघाट जिले में सती साधिनी राजकीय विश्वविद्यालय नाम से एक नया राज्य विश्वविद्यालय शुरू किया जाएगा. इसके अलावा राज्य सरकार ने दो नये मेडिकल कॉलेज खोलने का भी फैसला किया है.

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