एमनेस्टी इंटरनेशनल ग्रुप पर शिकंजा कसने की तैयारी है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मानवाधिकार के लिए काम करने वाली इस संस्था के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कराएगा. हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बेंगलुरु के एमनेस्टी इंटरनेशलल के दफ्तर पर छापा मारा था.
सीबीआई की ये छापेमारी विदेशी सहायता नियमन अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन को लेकर हुई थी. पिछले साल ईडी ने फेमा के तहत एमनेस्टी के खिलाफ जांच शुरू की थी. ईडी फिलहाल एमनेस्टी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल की तरफ से दी गई थी सफाई
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सीबीआई की छापेमारी के बाद बयान जारी कर कहा था कि वह भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह पालन करती है. उसने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई उसे परेशान करने के लिए की गई है. एमनेस्टी की ओर से कहा गया कि भारत में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ एमनेस्टी इंडिया जब भी बोला है तभी उसका उत्पीड़न किया गया. हमारे मूल्य वहीं हैं जो भारतीय संविधान में बहुवाद, सहिष्णुता आदि के लिए निहित हैं.
ED ने की थी छापेमारी
बता दें कि इससे पहले बीते साल अक्टूबर महीने में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु स्थित (Amnesty International) के कार्यालय पर छापेमारी की थी. ईडी ने एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के खिलाफ विदेशी मुद्रा विनिमय के धोखाधड़ी के एक मामले में उसके दो ठिकानों पर तलाशी ली थी. अधिकारियों ने कहा था कि विदेश मुद्रा विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत सीबीआई ने दस्तावेजों की तलाशी ली.
ED ने एमनेस्टी इंटरनेशनल को भेजा नोटिस
एमनेस्टी इंटरनेशनल को (ईडी) ने इसी साल सितंबर में कारण बताओ नोटिस जारी किया था. एमनेस्टी पर विदेशी मुद्रा कानून (फेमा) के तहत 51 .72 करोड़ रुपये के लेन-देन में नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है.
मुनीष पांडे