राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संगीतराज लोढा व जस्टिस विनीत कुमार माथुर ने सरकार द्वारा लहसुन के जीएसटी कर निर्धारण सूचि में सब्जी और मसाले, दोनों श्रेणियों में रखे जाने पर पर तीखे सवाल किए है. खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि क्या सरकार के पास कोई अधिकार है जिसके तहत वह लहसुन को सब्जी व मसाला दोंनों ही सूचियों में रख सकती है?
इस पर सरकार की ओर से खंडपीठ में मौजूद एएजी श्यामसुंदर लदरेचा को जवाब पेश करना था लेकिन समय की कमी के चलते खंडपीठ में सुनवाई टल गई. दरअसल भदवासिया स्थित मंडी की पोटेटो, ओनियन, फ्रूट व सब्जी विक्रेता संघ ने याचिका दायर करते हुए हाईकोर्ट से सरकार की इस कार्रवाई पर न्याय दिलाने की गुहार की थी कि अगर लहसुन को सब्जी मंडी में बेचा जाता है, तो उसपर सब्जी समझ कर जीएसटी नहीं लगती है जबकि उसे अनाज मंडी में मसाले के रूप में बेचा जाता है तो उस पर जीएसटी लगती है.
इस मामले में अब तक कोटा की ऑल इंडिया किसान संघ व जोधपुर की पावटा स्थित सब्जी मंडी के व्यापारियों ने भी पक्षकार बनने के आवेदन किए जिनको स्वीकार कर लिया गया है. इस याचिका की अब तक 17 बार सुनवाई हो चुकी है जबकि सरकार की ओर से अब तक यह कहा गया कि यह कार्रवाई किसानों को प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य उपलब्ध कराने के लिए की गई है.
सरकार का कहना था कि सब्जी मंडियों में एंटी टैक्स, दलाली और नीलामी आदि के जरिए किसानों को कम मूल्य प्राप्त होता है. इसलिए लहसुन, प्याज व अन्य मसालों जैसी चीजों को अनाज मंडी में बेचने के लिए सुविधा दिलाने के नाम पर लहसुन को दोनों सूचियों में रखा गया.
हाईकोर्ट ने पूछा था कि गार्लिक, मिर्ची आदि को अनाज मंडियों में इनके पाउडर शेप में बेचा जाता है, अत: यह अलग चीज बन गई, लेकिन क्या गार्लिक पाउडर के नाम से इसे मसाले की सूचि में डाला गया है या मनमाने ढंग से यह किया गया.
कोर्ट ने पूछा कि सरकार के पास क्या अधिकार है ये बताएं. आप कोई कार्यवाह विधि पूर्ण करेंगे या मनमाने ढंग से ही करेंगे. आगामी पेशी में अतिरिक्त महा अधिवक्ता श्यामसुंदर लादरेचा सरकार की ओर से जवाब पेश करेंगे.
शरत कुमार