राजस्थान का उदयपुर जिला मध्यकालीन मेवाड़ साम्राज्य की राजधानी होने के साथ आधुनिक राजस्थान की राजनीति में भी अहम स्थान रखता है. आदिवासी बहुल उदयपुर जिले में कुल आठ विधानसभा सीटों में गोगुंदा भी शामिल है.
गोगुंदा से बीजेपी ने प्रताप लाल भील ने कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया को 4411 वोटों से हरा दिया है. प्रताप लाल को 82307, मांगीलाल को 77896 वोट मिले. तीसरे नंबर पर सीपीआई लाहारा भील (4364) रहे.
2013 के विधानसभा चुनाव में यहां से बीजेपी के प्रताप लाल भील ने गोगुंदा से तीन बार के विधायक और गहलोत सरकार में मंत्री मांगीलाल गरासिया को शिकस्त दी थी. प्रताप लाल भील को 69,210 वोट जबकि मांगीलाल को 65,865 वोट मिले थे.
वहीं साल 2008 के विधानसभा चुनाव में गोगुंदा से कांग्रेस के मांगीलाल गरासिया तीसरी बार चुने गए थे. मांगीलाल ने बीजेपी के हंसाराम गरासिया को हराया था. मांगीलाल को 56,157 वोट जबकि हंसाराम को 46,045 वोट मिले थें.
गोगुंदा की बात करें तो यह मध्यकालीन राजपुताना के दिनों में बड़ी रियासतों में से एक रियासत थी. महाराणा उदय सिंह के निधन के बाद गोगुंदा में ही होली के दिन महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक हुआ था. गोगुंदा में महाराणा प्रताप ने राजधानी बनाई थी. चित्तौड़गढ़ के बाद उस जमाने में गोगुंदा रियासत का दूसरा स्थान था.
आजादी के बाद राजतंत्र के खात्मे के बाद लोकतंत्र की स्थापना हुई और गोगुंदा रियासत के नाम पर गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र का नाम रखा गया. गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र संख्या 149 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है.
2011 की जनगणना के अनुसार गोगुंदा विधानसभा की जनसंख्या 3,55,978 है. वहीं कुल आबादी का 94.96 फीसदी हिस्सा ग्रामीण और 5.04 फीसदी हिस्सा शहरी है. गोगुंदा विधानसभा में अनुसूचित जनजाति की आबादी कुल आबादी का 55.56 प्रतिशत जबकि अनुसूचित जाति 6.37 फीसदी है. 2017 की वोटर लिस्ट के अनुसार गोगुंदा में वोटरों की संख्या 2,36,297 है और 286 पोलिंग बूथ हैं.
साल 2013 के विधानसभा चुनाव में गोगुंदा में 73.7 फीसदी मतदान हुआ था. जिसमें बीजेपी को 45.49 फीसदी और कांग्रेस को 43.29 फीसदी वोट पड़े. वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 52.38 फीसदी और कांग्रेस को 37.37 फीसदी वोट मिले थे.
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