रियो ओलंपिक में भारत के हाथ सिर्फ दो मेडल लगने के बाद फिर ये बहस छिड़ी कि आखिर कैसे देश में खेल और खिलाड़ियों का स्तर सुधारा जाए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले तीन ओलंपिक में भारत के बेहतर प्रदर्शन करने के लिए बेशक टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया. लेकिन देश में आने वाले कल के लिए तैयार किए जा रहे खिलाड़ियों को किस हाल में रहना पड़ रहा है, इसी हकीकत से पर्दा उठाने के लिए 'आज तक' ने राजस्थान के इकलौते सरकारी स्पोर्ट्स स्कूल का रुख किया. बीकानेर स्थित सार्दुल स्पोर्ट्स स्कूल में 'आज तक' टीम ने जो कुछ भी देखा, वो होश उड़ा देने वाला था.
मेस में घूमते दिखे सांड
राजा सार्दुल सिंह के नाम पर बनाए गए इस स्पोर्ट्स स्कूल के अंदर की दयनीय हालत को 'आज तक' ने कैमरे में कैद किया. देश के भावी खिलाड़ियों को किस तरह की खुराक दी जा रही है, ये जानने के लिए कैमरा स्पोर्ट्स स्कूल के मेस और किचन में पहुंचा तो वहां का हाल नर्क से कम नहीं था. मेस में जहां बैठकर छात्र खाना खाते हैं, वहां आवारा सांड बिना कोई रोकटोक घूम रहे थे. छात्रों के लिए तय करना मुश्किल कि खाना खाएं या खुद को सांडों के वार से बचाएं.
किचन से खिलाड़ियों के लिए बीमारियों की सौगात
स्पोर्ट्स स्कूल के किचन की हालत और भी भयानक दिखी. यहां आटे में चीटियों ने डेरा डाला हुआ था तो दाल में मकड़ी ने. दूध में मलाई की परत की जगह मक्खियों ने ले रखी थी. खुले में खाने का सामान, पकाने का गंदा तेल और हर तरफ गंदगी. इधर-उधर बेतरतीब रखे गैस सिलेंडर किसी भी वक्त हादसे को न्योता देने की गवाही दे रहे थे.
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
स्पोर्ट्स स्कूल में 225 छात्र पढ़ रहे हैं. इनकी हर दिन की डाइट के लिए 100 रुपए खाने की खराब क्वॉलिटी और गंदगी को लेकर इन छात्रों का सब्र भी आखिर जवाब दे गया. मेस प्रभारी से लेकर स्कूल प्रबंधन तक कई बार शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई तो छात्रों के पास सड़क पर उतरने के अलावा कोई और चारा नहीं था. शिक्षा निदेशालय से लेकर प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए छात्रों ने प्रदर्शन का रास्ता चुना.
स्पोर्ट्स स्कूल के मेस प्रभारी से बात की गई तो वो लीपापोती की कोशिश करते दिखे. वहीं काफी कोशिश के बाद स्कूल के प्रिंसिपल अजयपाल सिंह सामने आए. प्रिंसिपल ने जांच की बात कहते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया.
प्रियंका झा / खुशदीप सहगल