अगले कुछ सालों में पंजाब के छात्र चीनी भाषा में बात करते सुने जा सकेंगे. पंजाब सरकार जल्दी ही स्थानीय स्कूलों में विदेशी भाषाएं खास कर चीनी भाषा के कोर्स शुरू करने जा रही है और इसकी घोषणा पंजाब के मुख्यमंत्री ने विधानसभा में करते हुए बताया कि 12वीं तक के छात्र वैकल्पिक भाषा के तौर पर चीनी भाषा पढ़ेंगे.
पंजाब के सरकारी स्कूलों में हिंदी ,पंजाबी और अंग्रेजी के साथ-साथ चीनी भाषा भी बच्चों को पढाई जाएगी. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि चीनी भाषा के साथ अन्य विदेशी भाषाओं के विकल्प भी छात्रों को मिलेंगे. ये विदेशी भाषाएं पंजाब के 11वीं और 12वीं के छात्र पढ़ सकेंगे और ये विकल्प के आधार पर होंगी.
मुख्यमंत्री कैप्टन सिंह ने कहा कि चीन की सीमाएं कई देशों के साथ लगती हैं. इस वजह से इन क्षेत्रों में चीनी भाषा बेहद लोकप्रिय होती जा रही है, साथ ही देश के कई राज्यों में चीन के लोग रहते हैं. ऐसे में चीन भाषा को अन्य भाषाओं को प्राथमिकता दी जाएगी.
दूसरी ओर, पंजाब के आप पार्टी के नेता अमन अरोड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के पास स्कूलों के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. सरकार कई स्कूल को बंद कर रही है और जो अन्य भाषाओं के कोर्स स्कूलों में चल रहे है, उनको पढ़ाने के लिए अध्यापक तो हैं नहीं लेकिन विदेशी भाषाओं को स्कूलों में लागू करने की बात कह रही है. ये एक हास्यस्पद पहल है.
आप नेता ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले पंजाब सरकार शिक्षा नीति के साथ-साथ छात्राओं और शिक्षकों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाए फिर उसके बाद विदेशी भाषाओं को लागू करे.
वहीं, अकाली दल की ओर से बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी सरकार के इस ऐलान पर एतराज जताते हुए कहा कि एक ओर तो पंजाब सरकार कह रही है कि उनके पास टीचरों को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं है और स्कूलों में भी इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है. ऐसे में चीनी भाषा पढ़ाने वाले ट्यूटर्स का प्रबंध कहां से किया जाएगा और उनको पैसा कहां से दिया जाएगा. ये अपने आप में सरकार की दोहरी रणनीति को दिखाता है.
पंजाब में पहले ही अंग्रेजी और मातृभाषा पंजाबी में सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के रिजल्ट की हालत बहुत ही खराब है, ऐसे में सरकार की चीनी भाषा को पढ़ाने के पीछे क्या रणनीति है और इसका पंजाब के छात्रों को क्या फायदा मिलेगा. ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.
सतेंदर चौहान