एनसीपी चीफ शरद पवार से अजित पवार की बगावत अब अगले दौर में पहुंच गई है. अब शरद पवार और अजित पवार दोनों गुट अपने आप को असली NCP बता रहे हैं. NCP किसकी... यह तय हो, इससे पहले दोनों गुटों ने आज अलग अलग बैठक बुलाई. अजित पवार की बैठक में 31 विधायक और 4 एमएलसी पहुंचे. बैठक को संबोधित करते हुए अजित पवार ने माना कि उन्होंने जितने विधायकों के समर्थन का दावा किया था, उतने इस बैठक में नहीं पहुंचे. उन्होंने कहा कि कई विधायक आज यहां नहीं हैं. कुछ अस्पताल गए हैं. कुछ पहुंच नहीं सके हैं. कुछ विधायक वाई बी चव्हाण सेंटर में हैं. लेकिन सभी मेरे संपर्क में हैं.
वहीं, वाई.बी. चव्हाण सेंटर में हो रही शरद पवार गुट की मीटिंग में 13 विधायक और चार सांसद पहुंचे. एनसीपी के कुल 53 विधायक हैं. ऐसे में 9 विधायक अब तक किसी गुट में शामिल नहीं हुए हैं.
एकनाथ शिंदे द्वारा बुलाई गई बैठक में शिंदे गुट के विधायकों के पहुंचने के बाद बैठक शुरू. एनसीपी के सरकार में शामिल होने के बाद शिवसेना के विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए आज बैठक बुलाई गई है.
शिवसेना विधायकों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि एनसीपी के आने से उनके खाते में आने वाले मंत्री पद अब बंट जायेंगे.
महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने अपने विधायकों के साथ मीटिंग बुलाई है. शिंदे ग्रुप के विधायक NCP के सरकार में शामिल होने की वजह से नाखुश बताए जा रहे हैं. शिंदे गुट को लगता है कि अब उनके लोगों को अच्छे पोर्टफोलियो (मंत्रालय) नहीं मिलेगा. शिंदे गुट के कई लोगों का यह भी कहना है कि उनके उद्धव गुट से अलग होने की एक वजह NCP के अजित पवार भी थे क्योंकि उनकी तरफ से शिंदे गुट के लोगों को महत्व नहीं दिया जाता था. सीएम शिंदे अब इन असंतुष्ट लोगों को समझाने का काम करेंगे.
महाराष्ट्र के राजनीतिक ड्रामा के बीच शरद पवार ने अब दिल्ली में NCP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है. ये मीटिंग दोपहर 3 बजे होगी. पवार कल सुबह दिल्ली जाएंगे.
NCP पार्टी में अभी 9 विधायक ऐसे हैं जिन्होंने अजित या शरद किसी का दामन नहीं थामा है. इसमें से एक सरोज अहीरे का बयान आया है. वह बोलीं कि मैं अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं से बात करूंगी. मैं अजित पवार और शरद पवार दोनों से मिली हूं लेकिन अभी कोई फैसला नहीं किया है. पवार साहब पिता की तरह हैं. दूसरी तरफ अजित दादा ने मेरे क्षेत्र में मेरा बहुत साथ दिया है. दोनों के बीच में से किसी एक को चुनना आसान नहीं है. इतने स्ट्रेस के चलते मैं बीमार हो गई. अजित दादा ने जो पेपर दिया उसपर बिना पढ़े साइन किया था. अभी आखिरी फैसला अपने लोगों से बात करके लूंगी.
NCP के नाम व निशान पर दावे को लेकर अजित और शरद पवार दोनों गुट चुनाव आयोग पहुंच गए हैं. पहले शरद पवार गुट ने अर्जी लगाई थी. इसमें कहा गया कि कोई भी एनसीपी पर अपने आधिपत्य का दावा आयोग के सामने करे तो आयोग शरद पवार पक्ष को भी जरूर सुने.
इसके कुछ घंटों बाद अजित पवार गुट ने चालीस से अधिक विधायकों के शपथ पत्र के साथ पार्टी पर दावा ठोका. अजित पवार गुट ने चालीस से ज्यादा विधायकों/सांसदों और MLC के हलफनामे के साथ पार्टी पर अपना दावा किया है. हालांकि, आज उनकी मीटिंग में 31 ही विधायक पहुंचे थे.
वहीं शरद पवार गुट ने आयोग से गुहार लगाई कि कोई भी अगर एनसीपी पर अपने अधिकार और नाम निशान पर दावा करे तो आयोग उनकी दलीलें भी सुने.पवार गुट ने पार्टी में बगावत कर दल बदल करने वाले अपने विधायकों की जानकारी भी आयोग को दी. आयोग को ये भी बताया गया है कि सत्ताधारी गठबंधन में मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले बागी विधायकों को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया है. (इनपुट- संजय शर्मा)
अजित पवार गुट ने चुनाव आयोग के सामने बड़ा दावा किया है. इसमें शरद पवार की जगह अजित पवार को NCP का अध्यक्ष बनाने का दावा किया गया है. बताया गया है कि कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने 30 जून को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी. इसमें प्रस्ताव पास किया गया है कि पार्टी लोगों के कल्याण के उद्देश्य से दूर जा रही है, ऐसे में शरद पवार की जगह अजित पवार को अध्यक्ष चुना जाता है.
चुनाव आयोग में भी अजित गुट ने अर्जी दायर की है. इसमें कहा गया है कि 30 जून को मुंबई में हुई कार्यकारिणी की बैठक में अजित पवार को NCP का अध्यक्ष चुना गया है.
शरद पवार ने अपने संबोधन में कहा कि जो लोग बीजेपी के साथ गए उनका इतिहास याद करना चाहिए. पंजाब में अकाली दल अब बीजेपी के साथ नहीं है. बिहार, आंध्र प्रदेश में बीजेपी सरकार से बाहर हुई. उसका गठबंधन टूटा. जो भी बीजेपी के साथ गया बाद में वह बाहर हो गया. बीजेपी गठबंधन वाली पार्टी को बर्बाद कर देती है. शरद ने आगे कहा कि नागालैंड का उदाहरण महाराष्ट्र में देना ठीक नहीं है. क्योंकि वहां सीमाई राज्यों में स्थिरता के लिए NCP बीजेपी के साथ गई. दरअसल, अजित पवार ने कहा था कि अगर नागालैंड में NCP बीजेपी को समर्थन कर सकती है तो महाराष्ट्र में क्यों नहीं.
अजित पवार की मीटिंग में आज कुल 31 विधायक पहुंचे. अजित ने दावा किया था कि उनके पक्ष में NCP के 53 में से 40 विधायक हैं. लेकिन फिलहाल उनको 31 का ही समर्थन मिला है. इनके नाम -
1. अजित पवार
2. छगन भुजबल
3. हसन मुश्रीफ
4. नरहरि झिरवाल
5. दिलीप मोहिते
6. अनिल पाटिल
7. माणिकराव कोकाटे
8. दिलीप वाल्से पाटिल
9. अदिति तटकरे
10. राजेश पाटिल
11. धनंजय मुंडे
12. धर्मराव अत्राम
13. अन्ना बंसोड़
14. नीलेश लंके
15. इंद्रनील नाइक
16. सुनील शेलके
17. दत्तात्रय भरणे
18. संजय बंसोड़
19. संग्राम जगताप
20. दिलीप बनकर
21. सुनील टिंगरे
22. बालासाहेब अजाबे
23. दीपक चव्हाण
24. यशवंत माने
25. नितिन पवार
26. शेखर निकम
27. संजय शिंदे
28. राजू कोरमारे
29. बबनराव शिंदे
30. प्रकाशदादा सोलंके
31. मनोहर चंद्रिकापुर
विधान पार्षद (MLC)
1. अमोल मिटकारी
2. रामराज निंबालकर
3. अनिकेत तटकरे
4. विक्रम काले
आगे पीएम मोदी का जिक्र करते हुए शरद पवार ने कहा कि मोदी ने मध्य प्रदेश में भाषण दिया और कहा कि NCP ने 70 हजार करोड़ का स्कैम किया है. पवार बोले कि पीएम ने NCP पर कई कमेंट किए हैं. फिर अगर NCP भ्रष्ट पार्टी है तो उसे सरकार में क्यों शामिल किया.
अजित पवार की बैठक खत्म होने के बाद शरद पावर ने अपने गुट वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. अजित पवार पर इशारे में बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि अगर आप किसी चीज से खुश नहीं थे तो बातचीत से रास्ता निकालना चाहिए था. उन्होंने आगे अजित को नसीहत देते हुए कहा कि अगर कोई गलत काम किया तो वह सजा भुगतने को तैयार रहें. पवार ने आगे कहा कि हम सरकार का हिस्सा नहीं हैं, लोगों के बीच हैं.
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने बीजेपी पर भी निशाना साधा. वह बोलीं कि हमारी लड़ाई बीजेपी के खिलाफ है. हमारी पार्टी बीजेपी के खिलाफ है. सुप्रिया ने आगे कहा, 'उन्होंने कहा कि NCP भ्रष्ट पार्टी है. ना खाऊंगा ना खाने दूंगा कहने वाले जरूरत पड़ने पर सबको खा जाएंगे. मेरा कहना है कि सिर्फ एक भ्रष्ट पार्टी है, वह बीजेपी है.'
अजित पवार ने शरद पवार को उम्र का हवाला देते हुए राजनीति छोड़ने को कहा तो इसपर अब सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया आई है. सुप्रिया ने कहा, 'लोग कह रहे हैं कि कुछ लोग बूढ़े हो गए हैं इसलिए उनको सिर्फ आशीर्वाद देना चाहिए. रतन टाटा, अमिताभ बच्चन, वॉरन वफेट सब लोग बूढ़े हैं. फारूक अब्दुल्ला जो शरद पवार से तीन साल बड़े हैं वो भी बोल रहे हैं कि शरद को लड़ना चाहिए.' सुप्रिया ने यह भी कहा कि मुझे या किसी को भी निशाना बनाएं, लेकिन मेरे पिता (शरद पवार) को नहीं.
अजित पवार ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पवार साहब आप 83 साल के हो गए हैं , आप कभी रुकेंगे या नहीं. हम सरकार चला सकते है , हम में ताकत है. फिर हमे मौका क्यों नही , किसी भी घर में 60 साल के बाद रिटायर होते है और आशीर्वाद देने का काम करते है , फिर आप ऐसा क्यों नहीं करते?
अजित पवार के समर्थन में पहुंचे 30 विधायक, शरद खेमे में 13 विधायक
- अजित गुट की बैठक में अजित पवार समेत 30 विधायक और चार एमएलसी पहुंचे. इस बैठक में छगन भुजबल, हसन मुश्रिफ, नरहरि झिरवाल, दिलीप मोहिते, अनिल पाटिल, मानिक राव, दिलीप वाल्से पाटिल, अदिती तटकरे, धनंजय मुंडे, धर्मराव अत्राम, अन्ना बंसोड, नीलेश लंके, इंद्रनील नाइक, सुनील शेलके, दत्तात्रय भरणे, संजय बंसोड़, संग्राम जगताप, दिलीप बनकर, सुनील टिंगरे, सुनील शेलके, बालासाहेब अजाबे, दीपक चव्हाण, यशवंत माने, नितिन पवार, शेखर निकम, संजय शिंदे, राजू कोरमारे, बबनराव शिंदे पहुंचे.
- शरद पवार गुट की बैठक में किरण लहामाटे, अशोक पवार, रोहित पवार, राजेंद्र शिंगणे, अनिल देशमुख, जितेंद्र आव्हाड, संदीप क्षीरसागर, जयंत पाटिल, बालासाहेब पाटिल, सुनील भुसारा, राजेश टोपे, चेतन टोपे और विधायक सुमन पाटिल की जगह उनके बेटे रोहित पाटिल पहुंचे.
छगन भुजबल ने कहा, हम पर कानूनी मामलों के डर से यहां (अजित पवार के साथ) आने का आरोप लगाया जा रहा है. यह सही नहीं है. धनंजय मुंडे, दिलीप वाल्से पाटिल और रामराजे निंबालकर के खिलाफ कोई मामला नहीं है. हम यहां केवल इसलिए हैं क्योंकि आपके (शरद पवार) साहब के आसपास कुछ करीबी सहयोगी हैं, वे पार्टी को खत्म करना चाहते हैं. एक बार जब आप उन्हें किनारे कर देंगे तो हम आपके पास वापस आने के लिए तैयार हैं.
अजित पवार ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमने ये कदम क्यों उठाया? यह बड़ा सवाल है. शरद पवार हमारे नेता और गुरु हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है. लेकिन आज देश में जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह देखने की जरूरत है. हम एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यकों के लिए काम करना चाहते हैं. उनके लिए काम करना हमारा सपना है. वह सीएम कैसे बने? तब भी वही स्थिति पैदा हुई. वसंतदादा पाटिल की सरकार. पतन हुआ और शरद पवार ने PULOD का गठन किया और 1978 में सीएम बने.
उन्होंने कहा, 1980 में कांग्रेस की सुनामी आई. इंदिरा गांधी फिर देश की पीएम बनीं. इतिहास देखिए देश को करिश्माई नेतृत्व की जरूरत है. अब कहां हैं जनता पार्टी, जो 77 में सत्ता में थे, वे अब कहीं नहीं हैं. क्योंकि उनके पास करिश्माई नेतृत्व नहीं है.
अजित पवार ने कहा, 1999 में पवार साहब ने कहा था कि सोनिया गांधी विदेशी हैं. वह हमारी पीएम नहीं हो सकतीं. हमने पवार साहब की बात सुनी. भुजबल साहब ने शिवाजी पार्क में रैली की. और हमने महाराष्ट्र में जाकर प्रचार किया और हमने 75 सीटें जीतीं. सभी को महत्वपूर्ण विभाग मिले. लेकिन मुझे कृष्णा खोरे महामंडल मिला, जो 6 जिलों तक सीमित था. लेकिन मैंने लगातार काम किया. शासन-प्रशासन पर मेरी पकड़ बनाई.
अजित पवार ने माना कि बैठक में वे सभी विधायकों नहीं हैं, जिन्हें लेकर उन्होंने हस्ताक्षर करने का दावा किया था. उन्होंने कहा, कई विधायक आज यहां नहीं हैं. कुछ अस्पताल गए हैं. कुछ पहुंच नहीं सके हैं. कुछ विधायक वाई बी चव्हाण सेंटर में हैं. लेकिन सभी मेरे संपर्क में हैं.
अजित खेमे के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, जब हम शिवसेना की विचारधारा स्वीकार कर सकते हैं, तो बीजेपी की विचारधारा से क्या दिक्कत है. जब महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला बीजेपी के साथ आ सकते हैं, तो एनसीपी के साथ आने में क्या दिक्कत है.
उन्होंने कहा, आज प्रफुल्ल पटेल इस मंच से क्यों बोल रहे हैं, यह शरद पवार का मंच क्यों नहीं है? पूरा देश यही सवाल पूछ रहा है. लेकिन मैं इसके बारे में हर बात पर बात नहीं करने जा रहा हूं. लेकिन समय आने पर मैं सबकुछ बता दूंगा.
प्रफुल्ल पटेल ने कहा, बहुत सारे लोग अजित पवार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उन पर कई बार आरोप लगा रहे हैं. 2022 में जब शिंदे गुट गुवाहाटी में था, हर विधायक और सांसद शरद पवार साहब के पास गए और उनसे पूछा...उनसे भाजपा के साथ जाने की अपील की, लेकिन वह तैयार नहीं थे.
उन्होंने कहा, 2019 में आपने पूछा कि अजित पवार ने राजभवन में जाकर फडणवीस के साथ शपथ कैसे ली? अगर उन्होंने पार्टी के खिलाफ जाकर ऐसा किया था, तो उन्हें सरकार में डिप्टी सीएम और विपक्ष का नेता क्यों बनाया गया? मैं ज्यादा बात नहीं करना चाहता. जब समय आएगा, तब मैं किताब लिखूंगा, तब पूरा देश हिल जाएगा. आप सब जानते हैं कि मैं साये की तरह पवार साहब के साथ था, चाहे सही रहा हो या गलत. प्रफुल्ल पटेल ने कहा, हमने शरद पवार से अपील की थी कि हमारी बात सुनें और अपना आशीर्वाद दें. हमें अभी भी देर नहीं हुई है.
बताया जा रहा है कि अजित पवार की बैठक में अब तक 35 विधायक पहुंच चुके हैं. वहीं, मुंबई के वाईबी चव्हाण केंद्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली बैठक में कुल 13 विधायक, 3 एमएलसी और 4 सांसद मौजूद हैं. एनसीपी के कुल 53 विधायक हैं. अजित पवार को दल बदल कानून से बचने के लिए दो तिहाई यानी 36 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाकी के 5 विधायक किस गुट की बैठक में शामिल होते हैं.
शरद पवार खेमे की मीटिंग में पहुंचे ये 13 विधायक
शरद पवार खेमे की मीटिंग में अब तक किरण लहामाटे, अशोक पवार, रोहित पवार, राजेंद्र शिंगणे, अनिल देशमुख, जितेंद्र आव्हाड, संदीप क्षीरसागर, जयंत पाटिल, बालासाहेब पाटिल, सुनील भुसारा, राजेश टोपे, चेतन टोपे और विधायक सुमन पाटिल की जगह उनके बेटे रोहित पाटिल.
शरद पवार की बुलाई बैठक में अब तक 7 विधायक पहुंच चुके हैं. इतना ही नहीं बड़ी संख्या में समर्थकों का भी एनसीपी दफ्तर के बाहर जुटना शुरू हो गया है.
सूत्रों के मुताबिक अजित पवार की मीटिंग में 30 विधायक पहुंच चुके हैं. जो विधायक अब तक नहीं पहुंचे हैं, अजित पवार उन्हें फोन कर रहे हैं. बता दें कि इससे पहले दो विधायक पाला बदलकर अजित पवार के खेमे से शरद पवार के खेमे में चले गए थे. अजित को समर्थन देने वाले विधायकों का कहना है कि उन्हें पता नहीं था कि उनसे किस कागज पर हस्ताक्षर कराए गए हैं.
शरद पवार ने 1 बजे विधायकों, सांसदों और समर्थकों की बैठक बुलाई है. बैठक में अभी से विधायकों का पहुंचना शुरू हो गया है. अभी तक 6 विधायक मीटिंग में हिस्सा लेने पहुंच गए हैं.
- किरण लहामाटे
- अशोक पवार
- रोहित पवार
- देवेंद्र भुयार
- राजेंद्र शिंगणे
- अनिल देशमुख
अजित पवार की एंट्री से शिंदे गुट में बेचैनी दिख रही है. शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय शिरसाट ने कहा कि राजनीति में जब भी हमारे प्रतिद्वंद्वी हमारे साथ आना चाहता है तो हमें उन्हें शामिल करना पड़ता है और भाजपा ने यही किया. लेकिन एनसीपी नेताओं के साथ आने के बाद हमारे नेता नाराज हैं. क्योंकि एनसीपी के शामिल होने के बाद हमारे कुछ नेताओं को मनचाहा पद नहीं मिलेगा. यह सच नहीं है कि हमारे सभी नेता एनसीपी के हमारे साथ आने से खुश हैं. हमने सीएम और डिप्टी सीएम को भी इसकी जानकारी दी है और उन्हें इस मुद्दे को हल करना होगा.
संजय शिरसाट ने कहा, हम हमेशा से एनसीपी और शरद पवार के खिलाफ रहे हैं. शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को मोहरा बनाकर सरकार चलाई. महाराष्ट्र का सीएम होकर भी हमारा नहीं था. हमारा विरोध जायज है. हम पहले भी उद्धव ठाकरे को यही कहते थे कि एनसीपी पार्टी का साथ छोड़ें. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस मुद्दे का हल निकालेंगे.
अजित पवार को समर्थन देने वाले विधायकों में से दो विधायक वापस शरद पवार खेमे में लौट गए हैं. इन विधायकों का कहना है कि उन्हें पता नहीं था कि उनसे किस कागज पर हस्ताक्षर कराए गए हैं. उधर, अजित और शरद पवार खेमे में शामिल होने वाले विधायकों से समर्थन वाले हलफनामे में हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं.
अजित गुट में शामिल छगन भुजबल ने कहा कि हमने अपना काम किया. ये फैसले एक दिन में नहीं लिए जाते. हमने पार्टी के लिए जो अच्छा है, वह किया है. हमने एनसीपी को सत्ता में लाकर शरद पवार को गुरुदक्षिणा दी है. उनके भतीजे डिप्टी सीएम बने हैं. हमने यह सब योजना के तहत किया है. अगर शरद पवार 60 सालों से राजनीति में हैं, तो हम भी 56 साल से राजनीति कर रहे हैं. हम इस लड़ाई को चुनाव आयोग में लड़ेंगे.
अजित पवार गुट की बैठक में एनसीपी नेताओं और समर्थकों का जुटना शुरू हो गया है. अजित पवार को समर्थन देने पहुंच रहे विधायकों से हलफनामे में हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं.
अजित पवार गुट भले ही 40 विधायकों के समर्थन की बात कर रहा है, लेकिन पार्टी के विधायक तीन गुटों में बंट गए हैं. एक गुट अजित, तो दूसरा गुट शरद पवार के साथ है. जबकि विधायकों का एक धड़ा ऐसा भी है जो अभी अगर-मगर की स्थिति में फंसा हुआ है और ये फैसला नहीं कर पा रहा है कि जाएं तो जाएं कहां? अजित के साथ जाएं या शरद पवार के साथ रहें?
बताया जा रहा है कि अजित के पास अभी 24 विधायकों का समर्थन है. जबकि शरद पवार के समर्थन में 14 विधायक हैं. जबकि 15 विधायक ऐसे हैं, जो अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं. यानी किसी भी गुट में जाने का फैसला नहीं किया.
अजित पवार के साथ मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायक - धनंजय मुंडे (परली), छगन भुजबल (येओला), दिलीप वाल्से पाटिल (अंबेगांव), अदिति तटकरे (श्रीवर्धन), हसन मुश्रिफ (कागल), अनिल पाटिल (अमलनेर), धर्मरावबाबा अत्राम (अहेरी), संजय बनसोडे (उद्गीत).
वे विधायक जो अजित पवार के साथ हैं- सुनील टिंगरे (वडगांव शेरी), सुनील शेलके (मावल), अतुल बेंके( जुन्नार), अशोक पवार ( शिरूर), सरोज अहिरे (देवलाली), नरहरि ज़िरवाल ( डिंडोरी), इंद्रनील नाइक (पुसद), किरण लाहमाते (अकोले), नीलेश लंके (पारनेर), संग्राम जगताप (अहमदनगर शहर), शेखर निकम (चिपलून), दत्ता भरणे (इंडापुर), अन्ना बंसोडे (पिंपरी), माणिकराव कोकाटे (सिन्नर), दीपक चव्हाण (फलटण).
शरद पवार के साथ वाले विधायक- जयन्त पाटिल (वालवा), जीतेन्द्र आव्हाड( मुंब्रा), अनिल देशमुख ( कटोल), रोहित पवार ( कर्जत-जामखेड़), प्राजक्त तनपुरे (राहुरी), संदीप क्षीरसागर ( बीड शहर), दौलत दरोदा (शाहपुर), नवाब मलिक (अणुशक्तिनगर), मकरंद पाटिल (वाई), मानसिंह नाइक (शिराला), सुमनताई पाटिल (तासगांव), बालासाहेब पाटिल (कराड उत्तर), सुनील भुसारा (विक्रमगढ़), चेतन तुपे ( हडपसर).
वे विधायक जो अभी किसी के साथ नहीं- राजेंद्र शिंगणे (सिंदखेड राजा), राजेंद्र कारेमोरे (तुमसर), मनोहर चंद्रिकापुरे (अर्जुनी मोरगांव), चंद्रकांत नवघरे (वसमत), राजेश टोपे (घनसावंगी), नितिन पंवार (कलवान), दिलीप बनकर (निफाड), दिलीप मोहिते (खेद आलंदी), आशुतोष काले (कोपरगांव), प्रकाश सोलंखे (माजलगांव), राजेश पाटिल (चांदगढ़), यशवंत माने (मोहोल), बबन शिंदे (माधा), बाबासाहेब पाटिल (अहमदपुर), बालासाहेब अजाबे (आष्टी).
एनसीपी अजित पवार गुट की तरफ से मुंबई में रिएक्शन जारी किया गया है. अनिल पाटिल ने दावा किया है कि अजित गुट के पास कम से कम 40 विधायकों का समर्थन है. आज अहम बैठक के जरिए अजित पवार का गुट अपनी ताकत दिखा सकता है. वहीं, शरद पवार ने भी एक अहम बैठक का आयोजन किया है, जिसके जरिए वह अपनी ताकत का अहसास कराएंगे.
(इनपुट: पंकज खेलकर)
बताया जा रहा है कि विधायकों की बैठक के बाद अजित पवार गुट आज चुनाव आयोग पहुंच सकती है. माना जा रहा है कि अजित गुट एनसीपी के नाम पर पार्टी सिंबल पर दावा कर सकता है. वहीं, शरद पवार की ओर से चुनाव आयोग में कैविएट याचिका फाइल की गई है. शरद पवार गुट की ओर से कहा गया है कि चुनाव आयोग कोई भी फैसला करने से पहले उनकी बात भी सुने. साथ ही शरद पवार गुट ने शिंदे सरकार में शपथ लेने वाले 9 मंत्रियों की जानकारी चुनाव आयोग को दी है. एनसीपी ने चुनाव आयोग को बताया कि उन नेताओं को पार्टी बर्खास्त कर दिया गया है क्योंकि पार्टी के लाइन से हटकर उन्होंने यह फैसला लिया है.
- NCP के दोनों गुट आज शक्ति प्रदर्शन करेंगे. दोनों गुटों की ओर से विधायकों को व्हिप भी जारी किया गया है. जहां अजित पवार ने सुबह 11 बजे बांद्रा के एमईटी कॉलेज में पार्टी विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई है. वहीं, शरद पवार ने दोपहर 1 बजे नरीमन पॉइंट पर वाई.बी. चव्हाण सेंटर में सभी विधायकों, सांसदों और जिले से लेकर तालुका स्तर तक सभी अधिकारियों और इकाइयों के पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है.
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने पार्टी की बैठक बुलाने के लिए आधिकारिक पत्र जारी किया है. साथ ही एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले और प्रदेश प्रमुख जयंत पाटिल ने एक वीडियो जारी कर पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से भारी संख्या में पार्टी बैठक में शामिल होने की अपील की है. इसके अलावा नए चुने हुए सचेतक जितेंद्र आव्हाड ने सभी विधायकों को पार्टी की बैठक में शामिल होने के लिए व्हिप भी जारी किया है.
उधर, शरद पवार के बाद अजित पवार ने एनसीपी पर दावा ठोकते हुए जयंत पाटिल को एनसीपी के महाराष्ट्र अध्यक्ष पद से हटाने का ऐलान किया. इसके साथ ही अजित पवार ने सुनील तटकरे को एनसीपी के नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया. उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल को तुरंत सुनील तटकरे को कार्यभार सौंप देना चाहिए.
288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी के 53 विधायक हैं. अजित पवार के साथ 8 विधायकों ने मंत्रिपद की शपथ ली. अजित पवार गुट का दावा है कि उनके पास एनसीपी के 40 विधायकों का समर्थन है. हालांकि, बताया जा रहा है कि अजित के पास अभी 24 विधायकों का समर्थन है. जबकि शरद पवार के समर्थन में 14 विधायक हैं. जबकि 15 विधायक ऐसे हैं, जो अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं. यानी किसी भी गुट में जाने का फैसला नहीं किया.
अजित पवार ने तीन साल और 7 महीने में अपने चाचा और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से दूसरी बार बगावत की है. अजित पवार ने 23 नवंबर 2019 की तरह ही 2 जुलाई 2023 को राजभवन पहुंच अचानक डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली थी. पिछली बार शरद पवार ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया था और भतीजे अजित की बगावत को 48 घंटे के भीतर विफल कर दिया था. इसके बाद अजित पवार को डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था और वे चाचा के खेमे में वापस लौट गए थे. लेकिन इस बार बगावत अपने अगले दौर में पहुंच गए है.
अजित पवार ने 2 जुलाई को चाचा शरद पवार से बगावत कर दी थी और महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए. उन्होंने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. उनके साथ एनसीपी के 8 विधायकों ने भी शिंदे सरकार में मंत्री पद की शपथ ली. इसके बाद शरद पवार एक्शन में आ गए. उन्होंने अजित के साथ बगावत करने वाले तमाम नेताओं को एनसीपी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने स्पीकर से अजित पवार और 8 मंत्रियों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है.