13 दिसंबर 2001 को जब भारतीय लोकतंत्र के पावन मंदिर को आतंकियों ने निशाना बनाया. उस वक्त सुरक्षा में लगे जवानों ने उनका डटकर मुकाबला किया और सभी आतंकियों को ढेर कर दिया. इस दौरान देश ने अपने 9 जांबाजों को खो दिया.
मंगलवार को संसद पर हुए हमले की 15वीं बरसी है. संसद परिसद में शहीदों को श्रद्धांजलि देने का दौर जारी है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे अर्पित किए शहीदों को श्रद्धा सुमन.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद हमले की 15वीं बरसी पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि.
संसद भवन में हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी, और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह समेत उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी भी मौजूद रहे. उन्होंने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी.
13 दिसंबर को भारत के इतिहास की वो तारीख जो लोकतंत्र के मंदिर पर सबसे बड़े हमले के लिए याद दिलाती है. आज ही के दिन 2001 में गोलियों की आवाज से पूरा संसद भवन दहल गया था.
जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी मोहम्मद अफजल गुरु, जो भारतीय संसद पर हमले का दोषी था. उसे 9 फरवरी, 2013 को फांसी दे दी गई. 13 दिसंबर 2001 में भारतीय संसद में हमले के मास्टरमाइंड अफजल को सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में ही फांसी की सजा सुना दी गई थी.
कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी यादव ने अपार शौर्य और समझदारी से आतंकियों का सामना किया और हथियार न होते हुए भी अपनी जगह पर डटी रहीं. वे लगातार दूसरे सुरक्षाकर्मियों को आतंकियों के स्थिति की सूचना देती रहीं.
13 दिसंबर 2001 को लश्कर ए तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए पांच हथियार बंद आतंकियों ने संसद पर हमला किया था. इस हमले में एक नागरिक समेत 10 लोगों की मौत हो गई थी.