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भारत

Kumbh 2019: तस्वीरों में देखिए नागाओं की रहस्यमयी दुनिया

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 26 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 6:09 PM IST
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हमारी संस्कृति के मंथन से हर 6 साल बाद कुंभ रूपी अमृत निकलता है. संपूर्ण मानवता का संगम कुंभ में दिखता है. कुंभ में एक बार के स्नान से आपाधापी भरी जिंदगी की थकान दूर हो जाती है और इंसान फिर से ऊर्जा से युक्त हो जाता है. 

कुंभ ही वह स्थल है जहां पर नागा साधुओं के दर्शन होते हैं. भस्म में लिपटे, पूरी तरह से नग्न, ऊर्जावान नागा साधु कुंभ के सबसे बड़े आकर्षण होते हैं. मान्यता के अनुसार, आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए साधुओं का क्रम तय किया था. नागा यानी पहाड़ों पर रहने वाले ये साधु शस्त्र और शास्त्र दोनों में ही पारंगत होते हैं.

इंडिया टुडे के ग्रुप फोटो एडिटर बंदीप सिंह नागा साधुओं के साथ कुछ दिनों तक रहे और उन्होंने वहां से जूना अखाड़ा के साधुओं की कुछ अद्भुत तस्वीरें के जरिए उनके विलक्षण व्यक्तित्व की झलक दिखाने की कोशिश की है-

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नागा बाबा राजू पुरी 40 साल के हैं. चिलम के धुएं से उनकी आंखें रक्तरंजित लाल दिखाई पड़ती हैं. उन्हें क्रोध की मुद्रा में देखकर ऐसा लगता है जैसे वह साक्षात रौद्र शिव का रूप हों.

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युवा नागा बाबा कमल पुरी पश्चिम बंगाल के गंगा सागर से हैं. इस तस्वीर में वह अपनी ताकत और सहनशीलता का उदाहरण पेश कर रहे हैं. नागा साधुओं का विश्वास है कि अपनी यौन इच्छाओं पर काबू पाकर ही शारीरिक शक्ति अर्जित की जा सकती है इसीलिए वह गुप्तांग से कई अजूब करके दिखाते हैं.

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राधे पुरी की उम्र 52 साल है और वह उज्जैन के नागा साधु हैं. उन्होंने साधना के लिए कई सालों तक अपना हाथ उठाए रखने का संकल्प लिया है. पिछले 12 सालों से उन्होंने अपना हाथ नीचे नहीं किया है. नागा इस तरह की क्रियाएं शरीर पर मन की विजय को दिखाने के लिए करते हैं.

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धुएं के छल्लों में नागा संन्यासी चिलम पी रहे हैं. नागा साधु नियमित तौर पर चरस का सेवन करते हैं. वे इसे साधना के दौरान जाग्रत रहने और ध्यान केंद्रित करने के लिए जरूरी बताते हैं.

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55 साल के रमन गिरी बरेली से हैं. अपनी अनोखी दाढ़ी और बालों की वजह से वह पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय हो चुके हैं. वह पर्यटकों के सिर पर अपना पैर रखकर अपना आशीर्वाद देते हैं. 

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54 साल के नागा बाबा शक्ति गिरी और राजपुरी चूहे और कबूतर के साथ पोज देते हुए. शक्तिगिरी बाबा जहां 70 किलो वजनी रुद्राक्ष माना पहने हुए हैं, वहीं राजपुरी अपने सिर पर 21 किलो की रुद्राक्ष धारण किए हुए है.

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नागा साधु का पूरा शरीर भभूति में सना हुआ है. भभूत को नागा साधु पवित्र मानते हैं. यही इनके वस्त्र हैं और यही इनका श्रृंगार.

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