नागा बाबा राजू पुरी 40 साल के हैं. चिलम के धुएं से उनकी आंखें रक्तरंजित लाल दिखाई पड़ती हैं. उन्हें क्रोध की मुद्रा में देखकर ऐसा लगता है जैसे वह साक्षात रौद्र शिव का रूप हों.
युवा नागा बाबा कमल पुरी पश्चिम बंगाल के गंगा सागर से हैं. इस तस्वीर में वह अपनी ताकत और सहनशीलता का उदाहरण पेश कर रहे हैं. नागा साधुओं का विश्वास है कि अपनी यौन इच्छाओं पर काबू पाकर ही शारीरिक शक्ति अर्जित की जा सकती है इसीलिए वह गुप्तांग से कई अजूब करके दिखाते हैं.
राधे पुरी की उम्र 52 साल है और वह उज्जैन के नागा साधु हैं. उन्होंने साधना के लिए कई सालों तक अपना हाथ उठाए रखने का संकल्प लिया है. पिछले 12 सालों से उन्होंने अपना हाथ नीचे नहीं किया है. नागा इस तरह की क्रियाएं शरीर पर मन की विजय को दिखाने के लिए करते हैं.
धुएं के छल्लों में नागा संन्यासी चिलम पी रहे हैं. नागा साधु नियमित तौर पर चरस का सेवन करते हैं. वे इसे साधना के दौरान जाग्रत रहने और ध्यान केंद्रित करने के लिए जरूरी बताते हैं.
55 साल के रमन गिरी बरेली से हैं. अपनी अनोखी दाढ़ी और बालों की वजह से वह पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय हो चुके हैं. वह पर्यटकों के सिर पर अपना पैर रखकर अपना आशीर्वाद देते हैं.
54 साल के नागा बाबा शक्ति गिरी और राजपुरी चूहे और कबूतर के साथ पोज देते हुए. शक्तिगिरी बाबा जहां 70 किलो वजनी रुद्राक्ष माना पहने हुए हैं, वहीं राजपुरी अपने सिर पर 21 किलो की रुद्राक्ष धारण किए हुए है.
नागा साधु का पूरा शरीर भभूति में सना हुआ है. भभूत को नागा साधु पवित्र मानते हैं. यही इनके वस्त्र हैं और यही इनका श्रृंगार.