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भारत

9 गोलियों से आंख, ब्रेन हो गई थी डैमेज, जवान ने ऐसे दी मौत को मात

aajtak.in
  • 15 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST
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पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस की धूम है. अपनी जान कुरबां कर चुके जवानों का सारा देश श्रधांजली दे रहा है. वहीं, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सेना और अर्द्धसैनिक बलों के 112 कर्मियों को इस साल के वीरता पुरस्कारों की घोषणा की थी.

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इसमें सीआरपीएफ के कमांडेंट चेतन चीता को भी कीर्ति चक्र से नवाजा जाएगा. गौरतलब है कि सीआरपीएफ की 45 वें बटालियन कमांडिंग ऑफिसर चेतन चीता ने इस साल 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ का नेतृत्व किया था.

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इस पूरे ऑपरेशन के दौरान उन्हें 9 गोली लगी थी.आंख में गोली लगने के बावजूद चेतन चीता ने 16 राउंड गोलियां चलाई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर अबू हारिस को ढ़ेर कर दिया था.

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आंख में गोली लगने के बावजूद चेतन चीता ने 16 राउंड गोलियां चलाई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर अबू हारिस को ढ़ेर कर दिया था. हालांकि सिर में गोली लगने से वह कोमा में चले गए थे.

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शुरुआत में चेतन चीता को श्रीनगर के आर्मी अस्तपाल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें एयर एंबुलेंस के ज़रिये दिल्ली लाया गया था.

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दिल्ली एम्स के ट्रॉमा सेंटर में जब उन्हें लाया गया था, तब उनकी हालत बेहद गंभीर थी. उनके सिर में गंभीर चोटें थी. शरीर के ऊपरी हिस्से में कई जगहों पर फ्रैक्चर था, दाईं आंख भी क्षतिग्रस्त थी.

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डॉक्टर के अनुसार एक गोली उनकी दाईं आंख से होती हुई, ब्रेन को डैमेज करती हुई निकल गई थी. वहीं, एक गोली पीठ में लगी थी, जो उनके पेट से होते हुए बाहर निकल गई थी. इसकी वजह से आंत बुरी तरह डैमेज हो गई थी.

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दो महीने तक जिंदगी और मौत के बीच जंग जीतने के बाद वह मौत के मुंह से बाहर आ गए थे. ड‌िस्चार्ज होते ही जब पत्रकारों ने उनसे पूछा क‌ि आप कैसे हैं तो वो तुरंत बोले- 'I am ROCKING'.

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इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में चेतन ने कहा था कि चीता ने कहा कि वह कोबरा(कमांडो बटालियन फॉर रिज़ोल्यूट एक्शन) बटालियन में शामिल होना चाहते हैं.इसके अलावा वह कश्मीर वापस जाने और वहां की सेवा करने के लिए तैयार हैं.

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जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा गया कि तो उनका कहना था कि यदि मैं नौ गोलियां लगने के बाद भी आपके सामने जिंदा हूं तो इसका मतलब है कि अभी मेरा काम पूरा नहीं हुआ. मुझे देश के लिए अभी भी बहुत कुछ करना है.

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