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भारत

बॉलीवुड का वो शख्स जिससे बड़ा देश प्रेमी नहीं बना कोई दूसरा एक्टर

पुनीत पाराशर
  • 10 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 6:44 AM IST
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शहीद, रोटी कपड़ा और मकान, पूरब और पश्चिम व हिमालय की गोद जैसी फिल्मों में काम कर चुके एक्टर मनोज कुमार का वास्तविक नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी था. वह महज 10 साल के थे जब विभाजन के वक्त उन्हें जधियाला शेर खान छोड़कर दिल्ली जाना पड़ा. उनकी फिल्मों ने तमाम लोगों को मन पश्चिमी सभ्यता से भारतीय धरती की तरफ मोड़ा. 1965 में प्रदर्शित आई फिल्म “शहीद” को उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मो में गिना जाता है. फिल्म में उन्होंने भगत सिंह की भूमिका निभाई थी. आइए जानते हैं मनोज कुमार के बारे में कुछ ऐसी दिलचस्प बातें जिनके चलते उन्हें सबसे कामयाब और सबसे देशभक्त अभिनेता माना जाता है.

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दिल्ली आने के बाद मनोज कुमार का परिवार विजय नगर, किंग्सवे कैंप में शरणार्थियों के तौर पर रहा. इसके बाद ये लोग नई दिल्ली के पुराने राजेंद्र नगर इलाके में चले गए.

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फिल्म "पूरब और पश्चिम" के जरिए मनोज ने ऐसे लोगो की कहानी दिखाई जो दौलत के लालच में अपने देश की मिटटी छोडकर पश्चिम में पलायन कर गये.

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मनोज को पद्मश्री और दादा साहब फाल्के जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था.

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साल 1965 में आई फिल्म शहीद के बाद मनोज कुमार की छवि एक देशभक्त की बन गई थी.

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साल 1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें एक लोकप्रिय नारा "जय जवान जय किसान" के आधार पर एक फिल्म बनाने के लिए कहा था.

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इसके बाद मनोज कुमार ने साल 1967 में "उपकार" फिल्म का निर्देशन किया. इस फिल्म में उन्होंने एक सैनिक और एक किसान की भूमिका निभाई थी.

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