भारत में देसी वैक्सीन-कोवैक्सीन की मंजूरी के बाद सियासत थम नहीं रही. सवाल जल्दबादी में मंजूरी को लेकर, सवाल ट्रायल को लेकर है,सवाल इस बात पर भी है कि ये कितना कारगर होता है. प्रोटीन पर आधारित को-वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण में 800 लोगों पर ट्रायल हुआ. तीसरे चरण में साढ़े 22 हज़ार लोगों पर परीक्षण करने का दावा किया गया. लेकिन फाइनल नतीजा क्या रहा, इसका कोई आंकड़ा नहीं है. को-वैक्सीन पर उठते सवालों के बीच भारत बायोटेक ने दावा किया कि ट्रायल डेटा में पारदर्शिता न होने की बात गलत है. भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा एल्ला का सवालों पर दर्द छलका. उन्होंने कहा कि हम वैज्ञानिक 200 फीसदी ईमानदार हैं. पानी नहीं है हमारी वैक्सीन.