यह चर्चा 'हिंदू आतंकवाद' के राजनीतिक साजिश होने के विषय पर केंद्रित है. एक वक्ता ने तर्क दिया कि तथाकथित 'हिंदू आतंकवाद' की थ्योरी का कोई अंतरराष्ट्रीय संबंध नहीं था, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इसके विपरीत बोल रही थीं, जैसा कि समझौता एक्सप्रेस मामले में देखा गया.