असम में बहुविवाह पर रोक लगाने के पीछे सरकार की असल मंशा क्या है?

इमरान ख़ान के गिरफ़्तारी से जुड़ी अब तक की बड़ी बातें, असम में बहुविवाह पर क्यों रोक लगाना चाहती है सरकार और क्या है राइट टू रिपेयर लॉ जिससे अब ग्राहक ही होगा असली राजा? सुनिए 'आज का दिन' में.

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ख़ुशबू कुमार

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  • 10 मई 2023,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

पाकिस्तान की राजनीति का एक और दिन कल इतिहास में शुमार हो गया है. जब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कल गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में अफरा-तफरी मची हुई है. कई शहरों में देर रात तक पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI के कार्यकर्ता प्रदर्शन करते नजए आए. लाहौर में सेना के कोर कमांडर के घर को आग के हवाले कर दिया गया. पार्टी समर्थकों ने कई जगहों पर गाड़ियों में आग लगा दी. इस्लामाबाद और पेशावर में धारा 144 लागू है. इंटरनेट और सोशल मीडिया बंद कर दिया गया. इस्लामाबाद पुलिस ने ट्विटर पर लिखा है कि आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. पेशावर में एक महीने के लिए यह आदेश लागू हुआ है. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. भीड़ जान देंगे खान लेंगे के नारे के साथ आर पार की लड़ाई करने के तैयारी में थी. इमरान की सरकार में मंत्री रहे शेख़ राशिद अहमद पहले ही आशंका ज़ाहिर कर चुके थे कि जेल के भीतर ही इमरान को मारने की कोशिश की जाएगी. इमरान के समर्थकों को शेख अहमद की बात से मैसेजिंग गई कि उनके नेता को मार दिया जाएगा, उसे बचाने की ज़िम्मेदारी इनके कंधों पर ही है. कल पूरे दिन का घटनाकर्म कैसा रहा? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में पोलिगेमी यानी बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है. राज्य में इसे कैसे लागू किया जा सकता है इसके लिए उन्होंने स्पेशल कमिटी बनाने की भी बात कही है, जिसका काम होगा, संविधान के अनुच्छेद 25, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत और मुस्लिम पर्सनल लॉ अधिनियम, 1937 के प्रावधानों पर गौर करना. राज्य में भाजपा सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि वो समान नागरिक संहिता की ओर नहीं बढ़ रहे हैं. वो केंद्र का मुद्दा है, बहुविवाह पर वो राज्य के पास मौजूद शक्तियों के दायरे में रहकर काम करेंगे. लेकिन उनको इसकी ज़रूरत क्यों महसूस हो रही है, क्या वो समाज में सुधार लाने की मंशा से ऐसा करना चाहते हैं या कोई राजनीतिक कारण भी हैं? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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राइट टू रिपेयर, एक ऐसा राइट जिसकी ज़रूरत देश की जनता को सालों से थी. लेकिन मिली अब जा कर है. यूरोप में ग्राहकों को ये शिकायत थी कि कंपनियां अपने सर्विस सेंटर में ही खरीदे गए प्रोडक्ट को रिपयेर कराने के लिए मजबूर करते हैं और इसके एवज में अनाप-शनाप बिल बना देते है. अमेरिका में भी इसकी मांग उठी, कई सरकारों ने इसे एक अधिकार के रूप में दिया, भारत सरकार की ओर से भी, राइट टू रिपेयर अधिकार दिया गया है. इसके तहत ग्राहक को क्या अधिकार मिलते हैं, और इसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है और अभी भी किन सुधारों की गुंजाइश है?  'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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