बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों के लिए अनूठा हॉस्पिटल, बिस्तर के साथ-साथ ऑक्सीजन भी उपलब्ध

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर जहां किसान आंदोलन चल रहा है, वहीं हर रोज नए प्रयोग भी हो रहे हैं. आंदोलन को शुरू हुए लगभग डेढ़ महीने हो गया है. इसलिए हर रोज नई जरूरत के हिसाब से नई सेवाएं भी मुहैया कराई जा रही है.

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गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के लिए बनाया गया अस्पताल गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के लिए बनाया गया अस्पताल

कुमार कुणाल

  • गाजीपुर,
  • 11 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 3:35 PM IST
  • बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों के लिए हॉस्पिटल
  • बिस्तर के साथ-साथ ऑक्सीजन भी है उपलब्ध
  • 24 घंटे किसानों की सेवा में रहता है अस्पताल

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर जहां किसान आंदोलन चल रहा है, वहीं हर रोज नए प्रयोग भी हो रहे हैं. आंदोलन को शुरू हुए लगभग डेढ़ महीने हो गया है. इसलिए हर रोज नई जरूरत के हिसाब से नई सेवाएं भी मुहैया कराई जा रही है. अब गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का एक अपना अस्पताल खोला गया है जहां बिस्तर के साथ-साथ ऑक्सीजन सिलेंडर की भी सुविधा मौजूद है. इस अस्पताल को बनाने का मकसद किसी भी इमरजेंसी की हालत में किसानों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना है.

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यह अस्पताल 24 घंटे सेवा में रहता है. इस अस्पताल का पूरा मैनेजमेंट देखने वाले डॉक्टर विजय शर्मा बताते हैं कि पिछले 3 दिनों से अस्पताल इसी तरीके से काम कर रहा है. एक टेंट में चल रहे इस अस्पताल में फिलहाल 2 बिस्तरों की सुविधा दी गई है. दोनों बिस्तरों के साथ एक-एक ऑक्सीजन सिलेंडर के रखा गया है साथ ही साथ फर्स्ट एड के सभी उपकरण भी रखे गए हैं. 

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डॉ. विजय बताते हैं कि ग्रेटर नोएडा में उनका अपना अस्पताल है जिसका नाम गुरुदयाल हॉस्पिटल है. लेकिन वह फिलहाल अपनी पूरी सेवा गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों को ही दे रहे हैं. स्वास्थ्य सुविधा देने वाले सिर्फ डॉक्टर विजय ही नहीं है बल्कि उनके साथ कदम से कदम मिलाकर डॉक्टर कर्मवीर सिंह शेखो भी काम कर रहे हैं. डॉक्टर कर्मवीर को मानसिक स्वास्थ्य पर महारत हासिल है. और वह इससे पहले ब्रिटेन में भी प्रैक्टिस कर चुके हैं.

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डॉ. विजय बताते हैं कि वह हर रोज तकरीबन 300 के आसपास मरीजों को इलाज देते हैं. लेकिन पिछले 3 दिनों में लगभग 60 मरीज मानसिक स्वास्थ्य से ही जुड़े आए हैं जिन्हें ज्यादातर डिप्रेशन की समस्या है. ऐसे कई मरीजों को सलाह देने के बाद घर वापस भेज दिया गया लेकिन उनमें से कई अब भी आंदोलन के साथ ही जुड़े हुए हैं और गाजीपुर बॉर्डर पर ही रह रहे हैं. इस अस्पताल को चलाने में मदद खालसा हेल्प फाउंडेशन भी कर रहा है.

अस्पताल को चलाने वाले डॉक्टर बताते हैं कि अब तक 8 से 10 मरीज ऐसे आए हैं जिन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ी है. डॉ. विजय बताते हैं कि एक बच्चे का ऑक्सीजन लेवल 70 से भी नीचे चला गया था और उसे हमने तुरंत मैक्स पटपड़गंज रेफर कर दिया जहां वह 48 घंटे में ठीक भी हो गया. इलाज की पूरी सुविधा निशुल्क है और अगर अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत भी पड़ती है तो पूरा खर्चा खालसा हेल्थ फाउंडेशन ही उठा रहा है. 


 

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