फरीदाबाद के खोरी गांव में क्यों हुई UN की दिलचस्पी? हरियाणा सरकार से की ये अपील

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि फरीदाबाद जिले में खोरी गांव के लोगों को बेघर होने से बचाया जाए. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गांव में हुए अवैध निर्माणों को ढहाए जाने की बात कही है.

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फरीदाबाद में अवैध बस्तियों को ढहाने का जारी हो चुका है आदेश (तस्वीर-PTI) फरीदाबाद में अवैध बस्तियों को ढहाने का जारी हो चुका है आदेश (तस्वीर-PTI)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST
  • अवैध कब्जा हटाने का सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
  • मानवाधिकार विशेषज्ञों ने की आदेश टालने की मांग
  • लोगों की त्रासदी का उठाया मुद्दा, परेशान होंगे लोग
  • बिजली-पानी रोकने के फैसले को बताया अमानवीय

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की पहाड़ियों और जंगलों की जमीन पर अवैध कब्जा करने के खिलाफ एक्शन लेते हुए खोरी गांव में हुए निर्माणों को ढहाए जाने का आदेश दिया था. अब संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि ऐसा करने से गांव वासी बेघर हो जाएंगे और उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. ऐसे में उनकी रक्षा की जाए.

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सुप्रीम कोर्ट सोमवार को पुनर्विचार अपील पर सुनवाई करने जा रहा है. इस अपील में अरावली की पहाड़ियों और जंगल की जमीन पर जबरन कब्जा कर बनाए गए खोरी गांव को 19 जुलाई तक ढहाए जाने के आदेश पर फिर से विचार करने की गुहार लगाई गई है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जंगल की जमीन पर कब्जा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा.

हरियाणा सरकार ने खोरी गांव से हटाए जाने वाले लोगों को वैकल्पिक तौर पर फ्लैट्स और जमीन मुहैया कराने की स्कीम दी है लेकिन गांववालों को ये स्वीकार नहीं है. बयान जारी करने वाले इन विशेषज्ञों में बालकृष्णन राजगोपाल, मैरी लॉलर, सेसिलिया जिमेनेज डेमरी, फर्नांद डि वेरेनेस, पेड्रो अरोजो अगुडो, ओलिवर डे शटर और कोंबू बॉली बेरी भी शामिल हैं.

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मानवाधिकार की रक्षा करे सुप्रीम कोर्ट!

विशेषज्ञों ने अपने बयान में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की भूमिका कानून की रक्षा के साथ साथ जनता के बुनियादी अधिकारों का संरक्षण और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त मानवाधिकार कानूनों की रक्षा भी है. खोरी गांव के लोगों के मामले में जो आदेश हुआ वह भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के उद्देश्यों और प्रावधानों के मुताबिक नहीं है.

महामारी के बीच तबाह होंगे लोग!

कोविड महामारी के भीषण संकट काल में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बेघर होने से समस्या और बढ़ेगी. सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की परिपालना पर पुनर्विचार करे क्योंकि ऐसे कदमों से सरकार के उस लक्ष्य को नहीं पाया जा सकता, जिसके मुताबिक 2022 तक देश में हर नागरिक को घर मुहैया कराए जाने का संकल्प है.

पानी-बिजली काटने का फैसला अमानवीय!

महामारी के दौरान पलायन और बेघर होने के इस कठिन वक्त में अल्पसंख्यक और पिछड़े समुदाय के 20 हजार से ज्यादा बच्चे हैं. 5,000 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं. इनकी सुरक्षा और शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए. इन घरों की बिजली और पानी की लाइन भी काट दी गई है. यह अमानवीय है. इसके साथ ही यह भी अपील की गई है कि अपने ही देश के कानून की अनदेखी करते हुए भारत सरकार खोरी के निवासियों को बिना समुचित मुआवजे और व्यवस्था के जबरन बेघर न करे.
 

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