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Live: इच्छामृत्यु की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व रखा फैसला, कहा- मेडिकल एंगल से देखा जाएगा हरीश का केस

aajtak.in | नई दिल्ली | 15 जनवरी 2026, 12:30 PM IST

​​​​​​​गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए उनके माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला रिजर्व रख लिया है. सुप्रीम कोर्ट में पैसिव यूथेनेशिया से जुड़े इस मामले की सुनवाई शुरू हो गई है. ताजा अपडेट्स के लिए पेज को रिफ्रेश करते रहें...

हरीश को लेकर आएगा सुप्रीम फैसला (Photo: ITG)

गाजियाबाद के 31वर्षीय हरीश राणा पिछले 12 वर्ष से अधिक समय से कोमा में हैं. हरीश के माता-पिता की ओर से दायर पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की इजाजत मांगने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला रिजर्व रख लिया है.

हरीश को साल 2013 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान चौथी मंजिल से गिरने की वजह से सिर में गंभीर चोटें आई थीं. सिर में गंभीर चोट आने के बाद से ही हरीश कोमा में हैं. हरीश का उपचार चंडीगढ़ पीजीआई से लेकर दिल्ली एम्स तक चला, लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि उनके ठीक होने की संभावनाएं नहीं के बराबर हैं.

12:09 PM (3 घंटे पहले)

सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व रखा फैसला

Posted by :- Bikesh Tiwari

सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया की नैतिकता पर भी विचार किया. कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि क्या ट्यूब हटाने से मरीज की मौत भूख या पानी की कमी के कारण होगी, या फिर क्या कृत्रिम भोजन आर्टिफ़िशियल फीडिंग को एक ऐसी कृत्रिम चिकित्सकीय हस्तक्षेप माना जाए, जो मरीज को जिंदा बनाए हुए है. कोर्ट ने फैसला रिजर्व रख लिया है.

12:01 PM (3 घंटे पहले)

कोर्ट ने पूछा- कैसी रही है हरीश की स्थिति

Posted by :- Bikesh Tiwari

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हादसा वर्ष 2013 में हुआ था. वह कितने समय तक अस्पताल में भर्ती रहे? इस पर एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि वह कई महीने तक अस्पताल में रहे, उसके बाद उन्हें घर भेज दिया गया. जस्टिस पारदीवाला ने इस पर पूछा कि उसके बाद से उनकी स्थिति कैसी रही है? इस पर एमिकस क्यूरी ने बताया कि तब से उनकी हालत बिल्कुल वैसी ही बनी हुई है. उन्हें भोजन देने के लिए लगी ट्यूब हर दो–तीन महीने में बदलनी पड़ती है। घर पर उनकी देखभाल की जा रही है, लेकिन उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कोर्ट को बताया कि हरीश के इलाज के लिए हाइपरबारिक ऑक्सीजन थेरेपी भी आजमाई गई थी, लेकिन वह भी असफल रही. बाद में उन्हें दौरे (फिट्स) भी पड़ने लगे और उसके लिए वह अब भी दवाएं ले रहे हैं. जब भी कोई अन्य चिकित्सकीय समस्या होती है, उन्हें अस्पताल ले जाया जाता है और फिर वापस घर भेज दिया जाता है. उनकी हालत लगातार वही बनी हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या वह 2013 से ट्यूब्स के सहारे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में हैं? एमिकस क्यूरी ने कहा कि परिवार ने वर्ष 2024 में पैसिव यूथेनेशिया के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था. उस समय प्राथमिक मेडिकल बोर्ड ने पाया था कि उनकी स्थिति में सक्रिय चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी, क्योंकि उन्हें बिना सक्रिय हस्तक्षेप के जीवित रखा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे सक्रिय यूथेनेशिया कैसे मान लिया? बिना बाहरी हस्तक्षेप के उन्हें जीवित कैसे रखा जा सकता है? एमिकस क्यूरी ने इस पर कहा कि यह एक गलत निर्णय था.

11:50 AM (3 घंटे पहले)

सम्मान के साथ मृत्यु के अधिकार की भी हुई बात

Posted by :- Bikesh Tiwari

सुप्रीम कोर्ट ने सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकर पर भी विचार किया. कोर्ट में इस बात की भी चर्चा हुई कि जहां मृत्यु की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो, वहां सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार हो. एमिकस क्यूरी ने कोर्ट में अलग-अलग फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जीवन रक्षक उपचार हटाने की वैधता पर अदालतें पहले भी विचार कर चुकी हैं. एमिकस क्यूरी की ओर से यह भी कहा गया कि परिजन और मेडिकल भले सहमति जता दे, अंतिम निर्णय कोर्ट को ही करना है.

11:44 AM (3 घंटे पहले)

हरीश राणा के ठीक होने की उम्मीद नहीं- एमिकस क्यूरी

Posted by :- Bikesh Tiwari

सुप्रीम कोर्ट में हरीश राणा को इच्छामृत्यु देने से संबंधित मामले में सुप्रीम सुनवाई शुरू हो गई है. एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट को ये बताया है कि यह मामला 'कॉमन कॉज' वाले फैसले में निर्धारित पैसिव यूथेनेशिया से जुड़ी गाइडलाइंस के अनुप्रयोग से संबंधित है. एमिकस क्यूरी ने यह भी कहा है कि हरीश राणा वर्ष 2013 से क्लिनिकल लाइफ सपोर्ट पर हैं और उन्हें 100 प्रतिशत दिव्यांगता है. उनके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है.