बीते जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना को लेकर केंद्र सरकार को जो डेडलाइन दी थी वह आज खत्म हो रही है. जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सेना के सेवानिवृत्त नियमित कैप्टनों को वन रैंक वन पेंशन योजना के हिसाब से पेंशन का भुगतान नहीं करने को लेकर केंद्र सरकार को लताड़ लगाई थी और पांच लाख का जुर्माना भी लगाया था.
अदालत ने तब कहा था कि 14 नवंबर तक अगर इस मामले पर फैसला नहीं लिया गया तो वह सेवानिवृत्त नियमित कैप्टनों की 10 फीसदी पेंशन बढ़ाने का निर्देश दे देगी. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को निर्णय लेने के लिए 14 नवंबर तक की डेडलाइन दी गई थी
तब जस्टिस खन्ना (वर्तमान में सीजेआई) की बेंच ने कहा था कि अगर केंद्र 14 नवंबर तक कोई निर्णय लेने में विफल रहता है तो हम 10 फीसदी बढ़ी हुई पेंशन का भुगतान करने का निर्देश देंगे.
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यहां फंसा है पेंच
OROP योजना मोदी सरकार द्वारा 2015 में शुरू की गई थी. इस योजना के तहत रिटायर सैनिकों के लिए पेंशन की दर सशस्त्र बलों के वर्तमान रिटायर सैनिकों के बराबर तय की गई है. हालांकि, अपर्याप्त डेटा और पेंशन योग्य सेवा के लिए सेवानिवृत्ति की न्यूनतम रैंक लेफ्टिनेंट कर्नल होने के कारण, विशेष रूप से कैप्टन और मेजर के रैंक के लिए विसंगतियां सामने आईं थी. सरकार ने कुछ साल पहले वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना के अनुसार सेना से सेवानिवृत्त नियमित कैप्टनों को बकाया भुगतान करने के लिए कहा था.
अदालत ने दिया था 3 महीने का समय
जुलाई में जब कोर्ट में सुनवाई हुई थी तो तब जस्टिस खन्ना ने केंद्र से सरकार पूछते हुए कहा था कितने साल तक ऐसा ही चलता रहेगा? वे रिटायर कैप्टन हैं. उनकी कोई बात नहीं सुनता है. उनकी सरकार तक पहुंच नहीं है इसलिए इन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है. या तो सरकार 10% अधिक भुगतान करना शुरू करे या जितना बनता है उतना भुगतान करें. आप अपना विकल्प चुनें.
इसके बाद, एएसजी भट्टी ने तीन महीने का समय मांगते हुए न्यायालय से तुरंत ऐसा आदेश पारित करने नहीं करने का अनुरोध किया था.जिस पर कोर्ट ने सहमति जताते हुए नियमित कैप्टन के मामले में उत्पन्न होने वाली विसंगतियों/मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए सरकार को 14 नवंबर 2024 तक का समय दिया था.
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आपको बता दें कि 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने ओरओपी योजना के तहत केंद्र सरकार को पेंशन का बकाया भुगतान करने के लिए तीन महीने का समय था. सितंबर 2022 में समयावधि को 3 माह और बढ़ा दिया गया. इतना ही नहीं जनवरी में फिर से इसे बढ़ाकर 15 मार्च 2023 कर दिया गया. जब बाद में कोर्ट के आदेश के बावजूद रक्षा मंत्रालय ने एकतरफा सर्कुलर जारी करते समयावधि बढ़ाई तो कोर्ट नाराज हो गया और सरकार को चेतावनी तक दे डाली.
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