यूपी की सियासत में मुख़्तार अंसारी की कहानी ख़त्म हो गई?: दिन भर, 5 जून

प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने वाले कैंडिडेट के भाई की हत्या के ज़ुर्म में मुख़्तार अंसारी को आज उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई. 32 बरस पुराना मामला क्या है जिसमें मुख़्तार अंसारी को सज़ा हुई है और क्या इससे उसकी पॉलिटिकल लेगेसी पर पूर्ण विराम लग गया है, ओडिशा के बालासोर ट्रेन हादसे के बाद रेल सेफ़्टी की चर्चा ज़ोर शोर से हो रही है. रेल मंत्रालय 'कवच' नाम का एक एंटी-कोलिज़न टेक्नीक लेकर आई थी. लेकिन इसके इम्प्लीमेंटेशन का क्या स्टेटस है, रेलवे के जिस साउथ ईस्ट ज़ोन में ये दुर्घटना हुई, वहां क्यों नहीं हो पाया. बिहार में हज़ारों करोड़ खर्च कर बन रहे एक पुल ने कल गंगा में जलसमाधि ले ली. 9 साल से बन रहा यह पुल कितनी डेडलाइन्स मिस कर चुका है, दो साल में दूसरी बार क्यों भड़भड़ाकर गिर गया? इस पर क्या सियासत हो रही है और इसका ज़िम्मेदार कौन है, रेसलर्स के प्रोटेस्ट में आज एक नई बात सामने आई कि इस आंदोलन के जो तीन प्रमुख चेहरे हैं - साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया. इन्होंने रेलवे में अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली है. पिछले दिनों इनकी अमित शाह से मुलाक़ात भी हुई थी. तो क्या इन खिलाड़ियों का रुख़ नरम पड़ रहा है और इनके आंदोलन का भविष्य क्या रहने वाला है, सुनिए 'दिन भर' में

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कुमार केशव / Kumar Keshav

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  • 05 जून 2023,
  • अपडेटेड 11:09 PM IST

मुख़्तार की पॉलिटिक्स का द एंड!

3 अगस्त, 1991 की बात है, सुबह का वक़्त था और जगह थी बनारस. कांग्रेस नेता अवधेश राय अपने भाई अजय राय के साथ घर के बाहर बातचीत कर रहे थे, अचानक से एक सफ़ैद वैन उनके घर के सामने रुकती है, इससे पहले दोनों भाई कुछ समझ पाते, गोलियां चलनी शुरू हो जाती हैं. अवधेश राय की मौत हो जाती है और अजय राय बच जाते हैं. इसी केस में मुख़्तार अंसारी को आज वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई. साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. मुख्तार फ़िलहाल उत्तर प्रदेश के बांदा जेल में है और उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की ज़रिए हुई.

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अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 1996 में पहली बार मऊ सदर विधानसभा सीट से चुनाव जीता था, इसके बाद 2002 और 2007 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़ा हो जीता, फिर 2012 में कौमी एकता दल का गठन किया और चुनाव लड़कर जीता.  साल 2017 के विधानसभा चुनाव में अंसारी ने समाजवादी पार्टी से टिकट मांगी, लेकिन नहीं मिल सका. इससे पहले साल 2014 में अंसारी ने भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ भी चुनाव लड़ने की बात कही थी, लेकिन बाद में ये कह कर पीछे हट गया कि इससे वोटों का ध्रुवीकरण हो जाएगा. अजय राय इस चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े थे.  

60 वर्ष के मुख्तार अंसारी के खिलाफ गाजीपुर, वाराणसी, मऊ और आजमगढ़ के अलग-अलग थानों में 61 मुकदमे दर्ज हैं. इनमें से आठ मुकदमे ऐसे हैं, जो कि जेल में रहने के दौरान दर्ज हुए थे, ज्यादातर मामले हत्या से संबंधित हैं, लेकिन हत्या से जुड़ा ये पहला मामला है जिसमें उसे सज़ा हुई है, सुनिए 'दिन भर' में

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यात्री सुरक्षा की पोल खुली

ओडिशा राजनीतिक मोर्चे पर बहुत कम चर्चित या लाइमलाइट वाला राज्य है. लेकिन बालासोर रेल हादसे के चलते आजकल सुर्ख़ियों में है. हादसे में अब तक 275 लोगों की जान जा चुकी है. 1100 लोग जख्मी हैं. 187 ऐसे शव हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाई है. तो कुल मिलाकर मामला अभी भी गंभीर है और रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव का भी यही स्टैंड है...

अश्विनी वैष्णव कह रहे हैं अभी बहुत कुछ करना बाकी है और हकीकत भी शायद यही है क्योंकि साउथ ईस्ट रेलवे जहां बालासोर ट्रेन हादसा हुआ, वहां कवच यानी कि एंटी कॉलिजन सिस्टम के लिए आवंटित बजट में से एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया. एंटी कॉलिजन सिस्टम से आप ये समझिए कि ये एक ऐसा सिस्टम है जो दो रेलगाड़ी को आमने सामने के टक्कर से बचाता है क्योंकि ये पहले ही रेलगाड़ी चालक को खतरे से आगाह करवा देता है. रेल मंत्रालय के सूत्रों ने आजतक को बताया  है कि बजट खर्च न होने की पीछे वज़ह है कवच का टेंडर न निकलना. वहीं आज फिर ओडिशा के ही बरगढ़ जिले के पास पटरी से मालगाड़ी के कई डिब्बे उतर गए. हालांकि इस हादसे में कोई हताहत नहीं है. तो सबसे पहले कवच को लेकर जो सरकारी रिपोर्ट है उसकी बात करते हैं. क्या कहते हैं इस रिपोर्ट के आंकड़े, सुनिए 'दिन भर' में

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रेत की तरह बहा पुल
ज़िम्मेदार कौन?

ओडिशा में हुए भयानक रेल हादसे की ख़बर से पूरा देश ग़मगीन था, कि कल एक और वीडियो ऐसा दिखा जिसने सबको हैरान कर दिया. ये बिहार के भागलपुर में एक पुल गिरने का वीडियो था, जो चंद सेकंड के अंदर रेत की तरह गंगा में बह गया. भागलपुर जिले में सुलतानगंज-अगुवानी के बीच गंगा नदी पर ये फोर लेन पुल बन रहा था. इसे खगड़िया और भागलपुर ज़िले को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है. 1717 करोड़ की लागत से बन रहे इस पुल के निर्माण का अस्सी फीसदी काम पूरा हो चुका था और इसी साल नवंबर में इसके उद्घाटन की तैयारी थी. लेकिन उद्घाटन से पांच महीने पहले ही क़रीब 200 मीटर लंबा  हिस्सा गंगा में समा गया. चौंकाने वाली बात ये है कि पिछले साल 30 अप्रैल को भी इसी पुल का एक हिस्सा गिरा था. तब कहा गया था कि तूफान की वजह से इसका बैलेंस बिगड़ गया और ये गिर गया था. बीजेपी के नेता भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर नीतीश सरकार को घेर रहे हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि पुल ठीक से नहीं बनाया जा रहा तभी यह बार-बार हो रहा है. उन्होंने अधिकारियों को एक्शन लेने का आदेश भी दिया है.

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सोशल मीडिया पर इस तरह की बात भी चल रही है कि इसका उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली किया था. तो ये प्रोजेक्ट किस सरकार का है और इतने पैसे खर्च होने के बाद भी पूरा क्यों नहीं हो रहा है? सुनिए 'दिन भर' में

 

पहलवानों के प्रोटेस्ट में कितनी आंच बाक़ी?

कुश्ती संघ के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ रेसलर्स के प्रोटेस्ट की अगुआई तीन पहलवान कर रहे हैं. बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट. आज इनको लेकर एक ख़बर आई कि ये तीनों रेलवे में अपनी ड्यूटी पर वापस लौट गए हैं. उसके बाद अटकलों का ये दौर चलने लगा कि इन तीनों पहलवानों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है. हालांकि, कुछ देर बाद तीनों ही खिलाड़ियों ने आंदोलन से पीछे हटने की खबर का खंडन कर दिया. साक्षी मलिक ने कहा- ये खबर बिलकुल गलत है. इंसाफ की लड़ाई में न हम में से कोई पीछे हटा है, न हटेगा. सत्याग्रह के साथ साथ रेलवे में अपनी जिम्मेदारी को साथ निभा रही हूं. उन्होंने पहलवानों के बीच किसी तरह के मतभेद की बात से भी इनकार किया.

साक्षी के बाद बजरंग और विनेश ने भी ट्वीट कर खबरों को गलत बताया है. पिछले दिनों इनकी अमित शाह से मुलाक़ात भी हुई थी. उसके बाद ये कहा जा रहा था कि सरकार के साथ इनकी सुलह हो गई है और उसी के बाद इनका रुख नरम पड़ गया है. उसी कड़ी में आज ये रेसलर्स अपनी जॉब पर वापस लौटे, सुनिए 'दिन भर' में

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