माउंट एवरेस्ट: जानिए नेपाल ने दो भारतीय पर्वतारोहियों पर क्यों लगाया 6 साल का प्रतिबंध

हरियाणा के रहने वाले नरेंद्र सिंह यादव और सीमा रानी ने करीब चार साल पहले दावा किया था कि उन्होंने माउंट एवरेस्ट की सफलतापूर्वक चढ़ाई कर ली है. तब नेपाल की ओर से उन्हें इसका सर्टिफिकेट भी दे दिया गया था.

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हरियाणा के रहने वाले हैं पर्वतारोही नरेंद्र (फोटो: ट्विटर अकाउंट) हरियाणा के रहने वाले हैं पर्वतारोही नरेंद्र (फोटो: ट्विटर अकाउंट)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 11:19 AM IST
  • दो भारतीयों पर नेपाल ने लिया एक्शन
  • माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के झूठे दावे का आरोप

दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का झूठा दावा करने वाले दो भारतीय पर्वतारोहियों पर एक्शन हुआ है. नेपाल के संस्कृति मंत्रालय ने दोनों पर ही 6 साल का बैन लगा दिया है. यानी अगले 6 साल में ये फिर से एवरेस्ट या नेपाल में मौजूद अन्य किसी पहाड़ी पर नहीं चढ़ पाएंगे.

दरअसल, हरियाणा के रहने वाले नरेंद्र सिंह यादव और सीमा रानी ने करीब चार साल पहले दावा किया था कि उन्होंने माउंट एवरेस्ट की सफलतापूर्वक चढ़ाई कर ली है. तब नेपाल की ओर से उन्हें इसका सर्टिफिकेट भी दे दिया गया था. लेकिन अब जब जांच पूरी की गई तो मालूम पड़ा कि ये दावा झूठा था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नेपाल के मंत्रालय ने बताया है कि उनकी जांच में ये पाया गया है कि दो भारतीय पर्वतारोही (नरेंद्र, सीमा) ने नकली डॉक्यूमेंट जमा किए थे. जिसमें माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की फोटो भी नकली थी. ऐसे में अब उनको दिए सर्टिफिकेट को वापस लिया जा रहा है, साथ ही उनपर प्रतिबंध लगाया जा रहा है.

नेपाल सरकार के मुताबिक, दोनों ही पर्वतारोहियों ने नेपाल टूरिज्म एक्ट का उल्लंघन किया है. दोनों ही पर्वतारोहियों के गाइड पर भी करीब 10 हजार नेपाली रुपयों का जुर्माना लगाया गया है. दोनों भारतीय पर्वतारोही एक टीम का हिस्सा थे, जिसमें कुल 14 लोग थे. 

इस टीम के टीम लीडर ने ही दोनों भारतीय पर्वतारोहियों को सर्टिफिकेट मिलने पर आपत्ति जताई थी और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के दावे को गलत बताया था. इसी के बाद नेपाल के मंत्रालय ने जांच शुरू की थी, जिसके बाद अब सबकुछ सामने आया है. 

साल 2016 में जब नरेंद्र और सीमा के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की बात सामने आई थी, तब काफी सुर्खियां बनी थीं. सीमा तो नेपाल में फंस भी गई थी, तब तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर उन्हें वापस लाने की बात कही थी.

गौरतलब है कि हर साल दुनियाभर से पर्वतारोही नेपाल पहुंचते हैं, जहां से माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की जाती है. इसके लिए मंत्रालय की ओर से परमिशन लेनी होती है, साथ ही काफी टेस्ट और जांच के बाद ही परमिशन दी जाती है. 

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