मोरबी ब्रिज हादसा: घड़ी बनाने वाली कंपनी को कैसे मिला पुल की मरम्मत का ठेका? : दिन भर, 31 अक्टूबर

सस्पेंशन ब्रिज को समय से पहले खोलने की क्या जल्दबाज़ी थी, मराठी मुस्लिम संघ का साथ उद्धव के लिए फायदेमंद या नुकसानदेह, कितना मुश्किल होगा लूला के लिए ब्राजील में सरकार चला पाना और क्यों मवेशियों की वजह से होते हैं ट्रेन हादसे? सुनिए 'दिन भर' में

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घड़ी बनाने वालों को पुल का ठेका क्यों घड़ी बनाने वालों को पुल का ठेका क्यों

ख़ुशबू कुमार / कुलदीप मिश्र

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  • 31 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 8:42 PM IST

कमाई के चक्कर में टूटा सस्पेंशन ब्रिज? 

गुजरात के मोरबी में कई जगह मातम की आवाज़ें पसरी हैं. आज की सुबह यहाँ लोगों के लिए वज्र बनकर आई. अचानक यहां सस्पेंशन ब्रिज टूटने से सैकड़ों लोग नदी में गिर गए. मरने वालों की संख्या 134 बताई गई है. कल रात जब ये हादसा हुआ तो इमरान अजमेरी वहीं मौजूद थे, जिनकी जान बाल बच गई. इस दौरान कई लोग ऐसे भी थे जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए दूसरे लोगों की जान बचाई. मोरबी गांव के तौफीक का दावा है कि उन्होंने 35 बच्चों की जान बचाई. गुजरात चुनाव से ठीक पहले गुजरात में हुआ ये भीषण हादसा प्रदेश की बीजेपी सरकार के लिए भी अच्छी ख़बर नहीं है. ख़ास तौर पर जब ब्रिज के रखरखाव और मरम्मत में लापरवाही साफ दिख रही है.आरोप है कि ब्रिज को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया गया था और एक समय पर तय लोगों से ज़्यादा लोग उस ब्रिज पर थे. इन सब लापरवाहियों की जांच अब SIT कर रही है. ये पुल शहर की नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र में था. नगर पालिका ने इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी अजंता ओरेवा ग्रुप ऑफ कंपनीज को सौंपी थी. कंपनी की प्रोफाइल और हादसे में कंपनी की लापरवाही किस तरह सामने आ रही है, और ब्रिज को बनाते वक्त या उसकी मरम्मत करते वक्त क्या कमी थी? 'दिन भर' में सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

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मराठी मुस्लिम किसके साथ?


महाराष्ट्र में नगरपालिका चुनाव के लिए सियासी गुणा-गणित जारी है. इसी सिलसिले में  22 अक्टूबर को, शिवसेना के मुखपत्र सामना के पहले पन्ने पर एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था 'मराठी आहोत..एकत्र काम करु!"'... जिसका हिंदी अनुवाद है - हम मराठी हैं, हम साथ में काम करेंगे. महाराष्ट्र के मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले एक संगठन जिसका नाम है MMSS यानि मराठी मुस्लिम सेवा संघ, उसने शुक्रवार को उद्धव ठाकरे से मुलाकत करके उन्हें बिना शर्त समर्थन दिया. इस ऑरगनाइज़ेशन के चीफ़ हैं फकीर ठाकुर. बीजेपी ने शिवसेना के इस गठजोड़ पर तीखा हमला किया है. बीजेपी अध्यक्ष आशीष शेलार ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताते हुए कहा, कि उद्धव बालासाहेब पार्टी मराठी और मुस्लिम वोट बटोरना चाहती है, लेकिन उसने बड़ी चतुराई से शब्दों के साथ खिलवाड़ किया और उन्हें मराठी मुसलमान बताया. हालांकि इस संगठन ने 2014 में बीजेपी को सपोर्ट किया था, लेकिन बाद में सरकार बनने के बाद ये गठबंधन टूट गया था. अब सवाल ये है कि मराठी मुसलमानों का साथ उद्धव ठाकरे का ये साथ ज़ाहिर है कि इस चुनाव में तो फायदेमंद साबित होगा ही, लेकिन अगर लॉन्गर रन में देखें तो क्या ये बेनिफ़िशियल साबित होगा या इससे नुकसान होगा? 'दिन भर' में सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

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ब्राजील की सत्ता में लेफ्ट की वापसी?

लैटिन अमेरिक के सबसे बड़े देश ब्राजील को नया राष्ट्रपति मिल गया है, लूला डा सिल्वा नाम है इनका.. और इसी के साथ बोलसोनारो, महिलाओं पर आपत्तिजनक बयानों के लिए मशहूर खाएर बोलसोनारो सत्ता से बाहर हो गए हैं. हालांकि जीत का ये अंतर बहुत कम रहा. कुल वोटों में से सिल्वा को 50.8 फीसदी वोट मिले और बोलसोनारो के हिस्‍से में आए 49.2 फीसदी वोट. बोलसोनारो ब्रज़ील के इतिहास में 30 सालों में देश के पहले ऐसे राष्‍ट्रपति हैं जो दोबारा राष्‍ट्रपति नहीं बन पाए. तो बोल्सोनारो जो अपनी अग्रेसिव राजनीति, विवादि

त बयानों की वजह से चर्चा में रहे, उनके हार के क्या कारण रहे और कोरोना के दौरान जिस तरह का मिसमैनेजमेंट देखने को मिला उनके समय में बावजूद इसके वो इतनी बड़ी संख्या में जनसमर्थन कैसे जुटा पाए? 'दिन भर' में सुनने के लिए यहां क्लिक करें.
 


क्यों बढ़ रहीं जानवरों से ट्रेनों की टक्कर?

देश में बीते दिनों ट्रेन से मवेशियों के टकराने की घटना में इजाफा हुआ है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मवेशियों के टकराने की वजह से सिर्फ अक्टूबर के पहले 9 दिनों में 200 से ज्यादा ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा है. इस साल 4 हजार से ज्यादा ट्रेनें मवेशियों की वजह से प्रभावित रही हैं. सबसे बुरा हाल तो मुंबई-अहमदाबाद वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को लेकर है, जिसे इसी साल 1 अक्टूबर को लॉन्च किया गया था. इस महीने यह ट्रेन तीन बार पटरी पर आए मवेशियों से टकरा चुकी है. सबसे पहले 6 अक्‍टूबर को चार भैंसों से टक्कर हुई थी. ठीक दो दिन बाद 8 अक्टुबर को एक गाय से टक्कर हुई थी जिसमें ट्रेन के नाक के पैनल को नुकसान हुआ था. और परसों यानि शनिवार की सुबह बैल से टक्कर हो गई. अब इस तरह के हादसे क्यों बढ़ रहे हैं? 'दिन भर' में सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

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