केरल: जाने माने इस हार्ट सर्जन की अपनी गायों के बीच पहुंच कर दूर हो जाती है दिन भर की थकान

गायों के बारे में बताते हुए डॉ जयकुमार का चेहरा देखते ही बनता है. डॉ जयकुमार के फार्म की गायों का दूध थूथूट्टी कोऑपरेटिव सोसाइटी को बेचा जाता है. फार्म में गायों की देखभाल के लिए केयरटेकर तैनात किया गया है. इसके अलावा शेड की सुरक्षा के लिए वहां दो कुत्ते भी हर वक्त मुस्तैद रहते हैं.  

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अपनी गायों के साथ डॉ जयकुमार (फोटो- सुमी सुलेमान) अपनी गायों के साथ डॉ जयकुमार (फोटो- सुमी सुलेमान)

aajtak.in

  • कोट्टायम ,
  • 14 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 2:28 PM IST
  • केरल के गाय प्रेमी डॉक्टर डॉ जयकुमार
  • जयकुमार केरल के जानेमाने कार्डियोलॉजिस्ट्स हैं

डॉ जयकुमार हार्ट सर्जन के नाते जितना अपना मरीजों के दिल का ख्याल रखते हैं, उतना ही उनका ध्यान अपने शेड की गायों की सेवा में रहता है. डॉ जयकुमार का कहना है कि हर दिन सर्जरी या अन्य प्रोफेशनल ड्यूटी की जो थकान होती है वो गायों के बीच आते ही दूर हो जाती है.  

डॉ जयकुमार जब अपने डेरी फार्म में गायों के बीच होते हैं तो वो खुद का सर्जन होना भूल किसान के रोल में आ जाते हैं.  

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डॉ जयकुमार का नाम केरल के जानेमाने कार्डियोलॉजिस्ट्स में शुमार है. वे कोट्टायम मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट हैं. कोट्टायम मेडिकल कॉलेज का नाम दुनिया भर में प्रसिद्ध हुआ जब इस डॉक्टर ने 7 कामयाब हार्ट ट्रांसप्लान्टेशन सर्जरी कीं. 

जहां तक डॉ जयकुमार के परिवार का सवाल है तो उसमें पत्नी और बेटी हैं. डॉ जयकुमार की पत्नी डॉ लक्ष्मी कोट्टायम के सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं. डॉ जयकुमार की बेटी चिन्मई को भी फॉर्म में गायों के बीच वक्त बिताना बहुत अच्छा लगता है.  

(फोटो- सुमी सुलेमान)

गायों के बारे में बताते हुए डॉ जयकुमार के चेहरे पर रौनक देखते ही बनती है. डॉ जयकुमार के फार्म की गायों का दूध थूथूट्टी कोऑपरेटिव सोसाइटी को बेचा जाता है. फार्म में गायों की देखभाल के लिए केयरटेकर तैनात किया गया है. इसके अलावा शेड की सुरक्षा के लिए वहां दो कुत्ते भी हर वक्त मुस्तैद रहते हैं.  

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गायों से प्रेम को लेकर डॉ जयकुमार का कहना है कि ये उन्हें किदानगुर में स्थित पैतृक घर से विरासत में मिला है. बचपन की यादों को साझा करते हुए डॉ जयकुमार बताते हैं कि उनकी मां जो गाय का दूध उन्हें पीने को देती थीं उसका टेस्ट उन्हें कभी नहीं भूला. उसी ने डॉ जयकुमार को प्रेरित किया. उन्होंने जो पहली गाय खरीदी उसका नाम भवानी रखा. आज शेड में भवानी के साथ और भी कई गाय हैं.  


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