India Today Conclave South 2023: देश की अर्थव्यवस्था के लिए ई-कॉमर्स का डेमोक्रेटाइजेशन जरूरी क्यों, ONDC के सीईओ ने बताई वजह

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के सीईओ थंपी कोशी गुरुवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2023 के पहले दिन के सत्र में शामिल हुए. शी ने कहा कि ई-कॉमर्स का लोकतंत्रीकरण (Democratisation) ई-कॉमर्स सेक्टर में पहले से प्रभुत्वशाली कंपनियों से निपटने के लिए जरुरी है.

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ओएनडीसी के सीईओ थंपी कोशी ओएनडीसी के सीईओ थंपी कोशी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2023,
  • अपडेटेड 7:13 PM IST

यूपीआई के इस दौर में आज ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) खूब सुर्खियां बटोर रहा है. यह एक ऐसा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जो विक्रेता और ग्राहक दोनों को एक ही मंच पर लेकर आता है. यह बात ओएनडीसी के सीईओ थंपी कोशी ने गुरुवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2023 के पहले दिन के सत्र में कही. 

इस दौरान कोशी ने कहा कि ई-कॉमर्स का लोकतंत्रीकरण (Democratisation) ई-कॉमर्स सेक्टर में पहले से प्रभुत्वशाली कंपनियों से निपटने के लिए जरुरी है. यह प्लेटफॉर्म विक्रेताओं का समान अवसर देता है, जो इस सेक्टर में गलाकाट प्रतियोगिता में अन्य विक्रेताओं को नहीं मिल पाता. इसके साथ ही विक्रेताओं और ग्राहकों दोनों के लिए यह सुविधाजनक भी है. 

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उन्होंने कहा कि ओएनडीसी पर ग्राहकों को एक साथ सभी सेलर दिखाई देंगे, यानी उन्हें सभी App पर जाकर चेक नहीं करना होगा. सभी सेलर एक ही जगह मौजूद होंगे तो ऐसे में ग्राहकों को यह आसानी से पता चल सकेगा कि कौन सा विक्रेता किस दाम पर क्या सामान बेच रहा है. ऐसे में ग्राहकों के लिए चयन करना आसान हो जाएगा. कोशी ने कहा कि ग्राहक खाना, टिकट और कोई भी प्रोडक्ट एक ही प्लेटफॉर्म से खरीद सकेंगे. 

ओएनडीसी अभी शुरुआती चरण 

सीईओ कोशी का कहना है कि ओएनडीसी अभी बहुत ही शुरुआती चरण में है. हालांकि, यह कोई सुपर ऐप या प्लेटफॉर्म नहीं है बल्कि एक नेटवर्क है.

ओएनडीसी कोई ऐप नहीं है. यह फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसा बिल्कुल नहीं है. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो विक्रेता और ग्राहक दोनों को मिलाता है. यह एक नॉन-प्रॉफिट ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है. इसे मुनाफा कमाने के मकसद से नहीं बनाया गया है. भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की पहल के तहत ओएनडीसी को तैयार किया गया है. 

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यह सिस्टम जियोग्राफिक इनफॉरमेशन सिस्टम (GIS) पर काम करता है. लाखों विक्रेताओं और करोड़ों उपभोक्ताओं को उनके वास्तविक लोकेशन के आधार पर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं.

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