गृह मंत्रालय ने बढ़ाई अरविंदर सिंह लवली की सुरक्षा, मिली Y+ कैटेगरी की सिक्योरिटी

Y+ कैटेगरी की सुरक्षा में सीआरपीएफ के जवान भी शामिल होते हैं. इस कैटेगरी की सुरक्षा में सीआरपीएफ के पांच जवान होते हैं. साथ ही तीन अलग-अलग शिफ्ट में 6 पीएसओ यानी पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर भी रहते हैं. यानी, हर शिफ्ट में दो पीएसओ.

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बीजेपी नेता अरविंदर सिंह लवली (Photo: ANI) बीजेपी नेता अरविंदर सिंह लवली (Photo: ANI)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 8:13 AM IST

केंद्र सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अरविंदर सिंह लवली को 'Y+' कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला किया है. गृह मंत्रालय के सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है. आईबी ने अपनी एक रिपोर्ट में खतरे की आशंका जताई थी जिसके आधार पर गृह मंत्रालय ने लवली को यह सुरक्षा प्रदान की है.

इससे पहले गृह मंत्रालय ने केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान की भी सुरक्षा बढ़ा दी थी. चिराग को जेड कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की गई है. पहले उन्हें एसएसबी के कमांडो सुरक्षा दे रहे थे अब उन्हें सीआरपीएफ सुरक्षा देगी.

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लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी में शामिल हुए थे लवली

अरविंदर सिंह लवली लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे. लवली ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे गए अपने इस्तीफे में कहा था वो खुद को अपाहिज महसूस कर रहे थे, क्योंकि दिल्ली के वरिष्ठ नेताओं द्वारा लिए गए सभी सर्वसम्मत निर्णयों को दीपक बाबरिया द्वारा 'एकतरफा वीटो' कर दिया गया था. लवली ने कहा था कि दिल्ली कांग्रेस यूनिट AAP के साथ गठबंधन के खिलाफ थी, लेकिन पार्टी आलाकमान इसके साथ आगे बढ़ गया. 

क्या होती है Y+ कैटेगरी की सुरक्षा?

बता दें कि भारत सरकार की ओर से देश के कुछ लोगों को सिक्योरिटी दी जाती है. मुख्य तौर पर गृह मंत्रालय की ओर से X, Y, Y Plus, Z, Z Plus सिक्योरिटी दी जाती है. इसके अलावा एक एसपीजी सिक्योरिटी होती है, जो सिर्फ देश के प्रधानमंत्री को मिली है. एसपीजी एक अलग फोर्स की तरह है, जो सिर्फ प्रधानमंत्री को कवर करती है.

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Y+ कैटेगरी की सुरक्षा में सीआरपीएफ के जवान भी शामिल होते हैं. इस कैटेगरी की सुरक्षा में सीआरपीएफ के पांच जवान होते हैं. साथ ही तीन अलग-अलग शिफ्ट में 6 पीएसओ यानी पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर भी रहते हैं. यानी, हर शिफ्ट में दो पीएसओ.

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