Nadimarg Massacre: नदिमार्ग नरसंहार मामले में 11 साल बाद फिर सुनवाई शुरू, इस वजह से बंद हुआ था केस

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने कहा है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से घटना में बचे हुए लोगों और गवाहों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए या फिर जम्मू में गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए एक न्यायिक आयोग नियुक्त किया जाना चाहिए. बता दें कि 2003 में हुए नरसंहार के बाद बचे हुए लोग जम्मू भाग गए थे. जिसके बाद केस को बंद कर दिया गया था.

Advertisement
जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट

सुनील जी भट्ट

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 1:49 PM IST

साल 2003 में हुए नदिमार्ग नरसंहार मामले में 11 साल बाद एक बार फिर से सुनवाई शुरू हो गई है. जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की श्रीनगर शाखा ने शोपियां जिले की निचली अदालत से मामले में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने को कहा है. जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने कहा है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से घटना में बचे हुए लोगों और गवाहों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए या फिर जम्मू में गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए एक न्यायिक आयोग नियुक्त किया जाना चाहिए. 2003 में हुए नरसंहार के बाद बचे हुए लोग जम्मू भाग गए थे. जिसके बाद केस को बंद कर दिया गया था.

बता दें कि 23 मार्च, 2003 की रात नदिमार्ग में सेना की वर्दी पहनकर आए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 24 कश्मीरी पंडितों को एक लाइन में खड़ा करके गोली मार दी थी. इनमें 11 महिलाओं के अलावा दो साल का एक बच्चा भी शामिल था. इस नरसंहार का मुख्य आरोपी जिया मुस्तफा पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकी है. जो 24 अक्टूबर 2021 को पुंछ में मारा गया था. मुस्तफा ने जेल में कुल 18 साल काटे थे और साल 2018 में जम्मू के कोट भलवल जेल में शिफ्ट किया गया था. 

Advertisement

2021 में मुस्तफा को आतंकी ठिकानों की पहचान के लिए 10 दिन की रिमांड पर जेल से बाहर लाया गया था. इस दौरान घुस्पैठियों ने गोलीबारी शुरू कर दी जिसमें 2 जवान और मुस्तफा को गोली लगी थी. बाद में मुस्तफा के शव को इलाके से निकालकर लाया गया. बता दें कि नरसंहार के मामले में कुल 7 आतंकियों को आरोपी बनाया गया था. मुस्तफा के अलावा इनमें से 3 और आतंकी 18 अप्रैल 2003 को दक्षिण कश्मीर में एक एंकाउंटर में मारे गए थे. 
 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement