विदेशी ऑटोमोबाइल कंपनियां एक के बाद भारत छोड़कर जा रही हैं. इससे डीलर्स पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोटिव डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने और डीलरों पर इसके प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की है. पिछले चार साल में पांच वैश्विक ऑटोमेशन कंपनियां भारत छोड़ चुकी हैं और इससे देश के 450 से अधिक डीलर प्रभावित हुए हैं.
एफएडीए के मुताबिक 450 से अधिक डीलर प्रभावित हुए हैं और 2485 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. हाल ही में फोर्ड ने भी भारत से कारोबार समेटने का ऐलान कर दिया. फोर्ड के भारत ने करीब 40 हजार कर्मचारी प्रभावित होंगे और इसका असर 170 डीलरशिप पर पड़ेगा.
डीलर्स के सामने भी संकट उत्पन्न हो गया है. साल 2007 में केएलएन ऑटोमोबाइल्स के मालिक के चंद्रशेखर ने जनरल मोटर्स के साथ डीलर के रूप में जाने का फैसला किया था. ये संबंध 10 साल से अधिक समय तक चला जब तक कि जनरल मोटर्स ने भारत से अपना कारोबार समेट नहीं लिया.
चंद्रशेखर ने कहा कि साल 2016 तक सबकुछ ठीक चल रहा था. तब हम जनरल मोटर्स की ग्लोबल सीईओ मैरी बारा से मिले थे. मैरी बारा ने आश्वास्त किया था कि भारत में उनकी रुचि है और वो कदम उठा रही हैं. इससे भरोसा जगा लेकिन दुर्भाग्य से 2017 में हमें बताया गया कि जनरल मोटर्स बंद हो रही है. जीएम मोटर्स बंद हो जाने के अचानक ऐलान से 300 डीलर और हजारों कर्मचारियों का भविष्य अंधेरे में चला गया. अचानक हुए ऐलान से अंधेरे में डूब गए. उन्होंने कहा कि हमारे यहां भी 350 कर्मचारी कार्यरत थे.
उन कठिन दिनों को याद करते हुए चंद्रशेखर बताते हैं कि श्रमिकों को स्थिति समझाना कठिन था. हर डीलर ने भारी निवेश भी किया था. मैंने 25 करोड़ से 35 करोड़ का निवेश किया था. उन्होंने आगे बताया कि मुझे तुरंत 50 से 60 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी और ये भी मेरी जिम्मेदारी थी कि उन्हें विकल्प खोजने में मदद करूं. चंद्रशेखर ने इसे भावनात्मक आघात बताया और इसके बाद डीलरशिप का व्यवसाय छोड़ दिया.
चंद्रशेखर इस समय फोर्ड जैसी ऑटोमोटिव कंपनियों के लिए टियर 1 और 2 आपूर्तिकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं. अब फोर्ड के भी भारत में कारोबार समेटने के फैसले को लेकर चंद्रशेखर कहते हैं कि जनरल मोटर्स ने हमें कुछ हद तक मुआवजा दिया. फोर्ड को डीलर के प्रति विचारशील होना चाहिए और उन्हें पूरे इकोसिस्टम के बारे में बात करनी चाहिए जिसमें कर्मचारियों के साथ ही बैंक भी शामिल हैं.
अक्षया नाथ