किसान आंदोलन के रंग, जलेबी, पिज्जा-मक्के की रोटी और सरसों की साग के संग

टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन में किसान जोर-शोर से शामिल हो रहे हैं. कुंडली में किसानों को रेस्तरां मालिक पिज्जा खिला रहे हैं. एक रेस्तरां मालिक ने कहा कि उन्होंने हजार पिज्जा लोगों को खिलाया है और कई किलो पास्ता भी बनाया है. किसानों के लिए रोज पांच क्विंटल जलेबी बनाई जा रही है.

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टिकरी बॉर्डर पर किसानों के लिए खाना तैयार करते लोग (फोटो- पीटीआई) टिकरी बॉर्डर पर किसानों के लिए खाना तैयार करते लोग (फोटो- पीटीआई)

आशुतोष मिश्रा / ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 13 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST
  • किसानों ने आंदोलन को उत्सव में बदला
  • न मौसम की मार का डर, न आंदोलन खिंचने का भय
  • 17 दिनों से आंगन बन गया है नेशनल हाईवे

दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर स्थित गाजीपुर पर भी किसानों का प्रदर्शन जारी है. गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की मंडली जमी है. दिल्ली का मौसम सर्द है, मगर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के तेवर गर्म हैं. किसान कृषि कानूनों की वापस से कम पर राजी नहीं है. 

गाजीपुर बॉर्डर पर ठंड से निपटने का पूरा इंतजाम है. लगातार चाय की केतली चढ़ी हुई है. जरूरतमंद किसान चाय और बिस्किट लगातार ले रहे हैं.  

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ट्रैक्टरों का लंबा जत्था लगा हुआ है. अलग-अलग गुट में युवा किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंच रहे हैं. इनके साथ महिलाएं और बच्चे भी हैं. इधर टिकरी बॉर्डर पर गाड़ियों की तादाद बढ़ रही है.

सभी के लिए बॉर्डर पर लंगर का इंतजाम है. कई जगहों पर किसान अपने लिए रोटियां भी बना रहे हैं. दिल्ली और हरियाणा का नेशनल हाईवे पिछले 17 दिनों से उनके अपने आंगन जैसा बन गया है. 

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किसान मक्के की रोटी और सरसों का साग बना रहे हैं. टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन में किसान जोर-शोर से शामिल हो रहे हैं. 

कुंडली में किसानों को रेस्तरां मालिक पिज्जा खिला रहे हैं. एक रेस्तरां मालिक ने कहा कि उन्होंने हजार पिज्जा लोगों को खिलाया है और कई किलो पास्ता भी बनाया है. 

किसानों के लिए रोज पांच क्विंटल जलेबी बनाई जाती है. किसानों ने कहा कि यहां कोई बड़ा छोटा नहीं है, सब एक साथ खाते हैं.  यहां मेले जैसा माहौल है और तरह-तरह के व्यंजन किसानों के लिए बनाए गए हैं. 

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किसानों ने फिलहाल आंदोलन को उत्सव में बदल दिया है. उनपर न तो मौसम की मार है और न ही उन्हें ये चिंता है कि आंदोलन कितने दिन चलेगा. उनकी एक ही मांग है कि नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए. 

 

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