दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा का निधन, नक्सलियों से संबंधों को लेकर चर्चा में आए थे

माओवादियों से कथित संबंधों के एक मामले में महज सात महीने पहले बरी किए गए दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पूर्व प्रोफेसर जी एन साईबाबा का ऑपरेशन के बाद की समस्याओं के कारण शनिवार को दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में निधन हो गया.

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जी एन साईबाबा जी एन साईबाबा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 6:37 AM IST

माओवादियों से कथित संबंधों के एक मामले में महज सात महीने पहले बरी किए गए दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पूर्व प्रोफेसर जी एन साईबाबा का ऑपरेशन के बाद की समस्याओं के कारण शनिवार को दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में निधन हो गया. वह 54 वर्ष के थे. साईबाबा पित्ताशय (Gall Bladder) के संक्रमण से पीड़ित थे और दो सप्ताह पहले उनका ऑपरेशन हुआ था जिसके बाद जटिलताएं पैदा हो गईं. शनिवार रात करीब नौ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. वह पिछले 20 दिन से 'निजाम्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' (एनआईएमएस) में भर्ती थे.

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आजीवन कारावास की सजा रद्द हुई थी
बंबई हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने माओवादियों से कथित संबंध मामले में साईबाबा एवं पांच अन्य को मार्च में बरी कर दिया था और कहा था कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहा है. अदालत ने उनकी आजीवन कारावास की सजा भी रद्द कर दी थी. अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत आरोप लगाने के लिए प्राप्त की गई मंजूरी को 'अमान्य' करार दिया था. बरी होने के बाद, साईबाबा व्हीलचेयर पर बैठकर 10 साल बाद नागपुर केंद्रीय कारागार से बाहर आए.

इलाज न मिलने को लेकर उठाए थे सवाल
साईबाबा ने इस साल अगस्त में आरोप लगाया था कि उनके शरीर के बाएं हिस्से के लकवाग्रस्त हो जाने के बावजूद प्राधिकारी नौ महीने तक उन्हें अस्पताल नहीं ले गए और उन्हें नागपुर केंद्रीय कारागार में केवल दर्द निवारक दवाएं दी गईं, जहां वह 2014 में इस मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद से बंद थे.

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झूठे मामले में गिरफ्तार करने की धमकी
अंग्रेजी के पूर्व प्रोफेसर ने दावा किया था कि उनकी आवाज दबाने के लिए उनका 'अपहरण' किया गया और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया. आंध्र प्रदेश के मूल निवासी साईबाबा ने आरोप लगाया था कि प्राधिकारियों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने 'बात करना' बंद नहीं किया तो उन्हें किसी झूठे मामले में गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

अपहरण का लगाया था आरोप
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनका दिल्ली से 'अपहरण' किया गया और उन्हें महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया. उन्होंने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एक जांच अधिकारी के साथ उनके घर गए और उन्हें एवं उनके परिवार को धमकाया. साईबाबा ने आरोप लगाया था कि गिरफ्तार करते समय महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें व्हीलचेयर से घसीटा और इसके परिणामस्वरूप उनके हाथ में गंभीर चोट लग गई, जिससे उनके तंत्रिका तंत्र पर भी असर पड़ा.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक के संबाशिव राव ने साईबाबा के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि यह समाज के लिए एक क्षति है. वामपंथी छात्र संगठन 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (आइसा) ने साईबाबा के निधन पर शोक जताया और उनके साहस एवं न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की.

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उसने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, 'अलविदा प्रोफेसर! आपका अदम्य साहस और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी.'

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