आशा का सूर्योदय अब होकर रहेगा... National Girl Child Day पर राहुल गांधी ने दिया खास मैसेज

राहुल गांधी ने एक फोटो शेयर की है. इसमें वे बच्चियों के साथ नजर आ रहे हैं. साथ ही राहुल ने लिखा, आंखों में सपने और मुट्ठी में एक बेहतर कल, हर चेहरा एक आशा की किरण है और आशा का सूर्योदय अब होकर रहेगा!

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राहुल गांधी ने राष्ट्रीय बालिका दिवस पर ये फोटो शेयर की. राहुल गांधी ने राष्ट्रीय बालिका दिवस पर ये फोटो शेयर की.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST
  • 24 जनवरी को मनाया जाता है राष्ट्रीय बालिका दिवस
  • इस दिन इंदिरा गांधी ने पहली बार देश की पहली महिला पीएम के तौर पर ली थी शपथ

भारत में 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) मनाया जाता है. इस मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक फोटो के साथ कुछ लाइनें शेयर की हैं. राहुल गांधी ने लिखा, आशा का सूर्योदय अब होकर रहेगा. 

राहुल गांधी ने एक फोटो शेयर की है. इसमें वे बच्चियों के साथ नजर आ रहे हैं. साथ ही राहुल ने लिखा, आंखों में सपने और मुट्ठी में एक बेहतर कल, हर चेहरा एक आशा की किरण है और आशा का सूर्योदय अब होकर रहेगा! 

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क्यों मनाया जाता है National Girl Child Day?

भारत में हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है. 2008 में यूपीए सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसकी शुरुआत की थी. 24 जनवरी का दिन राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के लिए इसलिए चुना गया, क्योंकि इसी तारीख को 1966 में इंदिरा गांधी ने भारत की पहली महिला पीएम के तौर पर शपथ ली थी. 

एक तरफ हमारे देश में जहां महिलाओं को देवियों का दर्जा दिया जाता है. वहीं कहीं ना कहीं लड़कियों के साथ भेदभाव और मूलभूत अधिकारों से वंचित भी रखा जाता रहा है. चाहे वो शिक्षा का अधिकार हो या फिर सुरक्षा या सम्मान. हालांकि मौजूदा समय में हालात और लोगों की सोच बदली है. आज बेटियां और महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं.

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नेशनल गर्ल चाइल्ड डे यानी राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इसमें बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा, लिंग अनुपात, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है. दरअसल, प्राचीन काल से ही महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता रहा है. अभी भी, गांव में ही नहीं बल्कि शहरों में भी कई तरीकों से महिलाओं को लिंगभेद का सामना करना पड़ता है.

 

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