बेंगलुरु में 28 नवंबर को महाठग सुकेश चंद्रशेखर की जब्त की गईं 12 लग्जरी कारों की नीलामी होगी. इस नीलामी के जरिए प्राप्त राशि से जांच एजेंसियां विभिन्न संस्थानों की बकाया राशि का भुगतान करेंगी. एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सुकेश पर कुल बकाया रकम 300 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है, जो उसने विभिन्न संस्थानों से कर्ज के रूप में लिया था और कभी लौटाया नहीं.इन सुकेश के वित्तीय लेनदेन की जांच करने वाले आयकर विभाग के अधिकारियों ने इनवाहनों को 2018 में तमिलनाडु और केरल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से जब्त किया था.
बेंगलुरु में सुकेश की जिन वाहनों की नीलामी की जाएगी, उनमें 11 चार पहिया वाहन शामिल हैं. में रोल्स रॉयस, BMW, पोर्श, जगुआर जैसी हाई एंड कारें शामिल हैं. ये वाहन अच्छी स्थिति में हैं. इनमें बीएमडब्ल्यू एम-5, रेंज रोवर, जगुआर एक्सकेआर कूप, इनोवा क्रिस्टा, निसान टीना, पोर्शे, टोयोटा फॉर्च्यूनर, बेंटले, रोल्स रॉयस, लेम्बोर्गिनी और टोयोटा प्रेड जैसी कारें शामिल हैं. इसके अलावा सुकेश की 'डुकाटी डियावेल' बाइक भी नीलाम की जाएगी. नीलामी के लिए इन वाहनों की शुरुआत कीमत 2 लाख से 2 करोड़ रुपए तक रखी गई है.
सुकेश पर 200 करोड़ की ठगी करने का आरोप
सुकेश चंद्रशेखर पर रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों की पत्नियों के साथ ₹200 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप है. उसने कंपनी के प्रमोटरों को जमानत दिलाने का वादा करके यह ठगी की थी. उस पर कानून मंत्रालय के एक अधिकारी का रूप धारण कर महिलाओं को धोखा देने और ठगी करने का भी आरोप है. वह मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच का भी सामना कर रहा है. वह इस समय दिल्ली की एक जेल में बंद है. यह 35 वर्षीय महाठग बेंगलुरु का रहने वाला है. इसने एक्ट्रेस लीना मारिया पॉल से शादी की है, जो उसके ठगी में साथी थी.
इस फरवरी में कोर्ट ने दी थी नीलामी की इजाजत
दिल्ली की एक अदालत ने इस साल 14 फरवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सुकेश चंद्रशेखर के 26 वाहनों की नीलामी करने की अनुमति दी थी. कागजात में इन गाड़ियों की मालकिन सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया है. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अदालत के समक्ष कहा था कि ईडी ने जांच के लिए मामले से जुड़े वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया है. ईओडब्ल्यू ने कोर्ट से ईडी के साथ नीलामी में हिस्सा लेने की इजाजत मांगी थी.
ईडी ने अदालत को बताया था कि जांच के दौरान जब्त किए गए वाहनों का रखरखाव काफी महंगा है और इन्हें इस्तेमाल के लिए रखना सार्वजनिक खजाने पर बोझ होगा. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेन्द्र मलिक ने मामले में वकीलों की दलीलें सुनने के बाद ईडी को मामले से जुड़े वाहनों की नीलामी करने की अनुमति दी थी. अदालत ने ईओडब्ल्यू अधिकारियों को भी नीलामी में भाग लेने की अनुमति दी थी.
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