लोकसभा में अखिलेश-डिंपल की जोड़ी, पहले ये कपल भी रह चुके हैं सांसद

हाल ही में 18वीं लोकसभा के सदस्यों ने शपथ ली. अबकी बार लोकसभा में सबसे ज्यादा चर्चा अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव की है. दोनों उत्तर प्रदेश से एक साथ जीतकर संसद पहुंचे हैं. इनके अलावा भी कई ऐसे सांसद हैं जो अलग-अलग समय पर पति-पत्नी के रूप में एक साथ लोकसभा सदस्य रह चुके हैं.

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अखिलेश यादव, डिंपल यादव- फाइल फोटो अखिलेश यादव, डिंपल यादव- फाइल फोटो

आलोक रंजन

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2024,
  • अपडेटेड 5:50 PM IST

हाल ही में 18वीं लोकसभा के सदस्यों ने शपथ ली. अबकी बार लोकसभा में सबसे ज्यादा चर्चा अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव की है. दोनों उत्तर प्रदेश से एक साथ जीतकर संसद पहुंचे हैं. इनके अलावा भी कई ऐसे सांसद हैं जो अलग-अलग समय पर पति-पत्नी के रूप में एक साथ लोकसभा सदस्य रह चुके हैं. हम इस खबर में कुछ ऐसे ही जोड़े के बारे में बता रहे हैं जो निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे हैं.

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अखिलेश यादव, डिंपल यादव
मौजूदा 18वीं लोकसभा में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव सबसे चर्चित जोड़ी हैं. वे उत्तर प्रदेश से एक साथ लोकसभा के लिए चुने जाने वाले पहले जोड़े हैं. अखिलेश कन्नौज से जबकि डिंपल मैनपुरी से चुनी गई हैं. अखिलेश और डिंपल इससे पहले 17वीं लोकसभा में अलग-अलग टाइम पीरियड में रह चुके हैं. 

अखिलेश 2019 में आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र से जीते थे, जबकि डिंपल कन्नौज से चुनाव हार गई थीं. मार्च 2022 में विधानसभा चुनाव में करहल विधानसभा सीट से विधायक चुने जाने के बाद अखिलेश ने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था. मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद डिंपल ने 2022 के उपचुनाव में मैनपुरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार रघुराज शाक्य को 2.88 लाख वोटों से हराकर जीत हासिल की थी.

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ए के गोपालन और सुशीला गोपालन (1967-70 के बीच चौथी लोकसभा)
भारत में कम्युनिस्ट पार्टी और वामपंथी और लोकतांत्रिक आंदोलन के मुख्य वास्तुकारों में से एक, ए.के. गोपालन एक स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे. वे 1952 से 1977 के बीच 5 बार लोकसभा सांसद रहे और केरल के पालघाट से चुने गए. उन्होंने 1962 में ई एम एस नंबूदरीपाद, एस ए डांगे और अन्य सदस्यों के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छोड़ दी. वे CPI (मार्क्सवादी) के संस्थापक सदस्य थे.

उनकी पत्नी सुशीला गोपालन भी एक प्रसिद्ध मार्क्सवादी और ट्रेड यूनियनिस्ट थीं. वह पहली बार 1967 में केरल के चिरायिनकिल से लोकसभा के लिए चुनी गईं. 1980 में वह सातवीं लोकसभा के लिए फिर से चुनी गईं और 1991 में तीसरी बार दसवीं लोकसभा के लिए चुनी गईं.

सत्येंद्र नारायण सिन्हा और किशोरी सिन्हा (1980 और 1989 के बीच 7वीं और 8वीं लोकसभा)
सत्येंद्र नारायण सिन्हा और किशोरी सिन्हा बिहार के औरंगाबाद में एक कुलीन और धनी परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लिया था. वह 1952 से छह बार औरंगाबाद निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए. वह 1989 से 1990 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे. उनकी पत्नी किशोरी 1980 से 1989 के बीच लोकसभा में उनके साथ थीं. वह वैशाली से चुनी गईं.

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चौधरी चरण सिंह और गायत्री देवी (1980 से 1984 के बीच 7वीं लोकसभा)

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह तीन बार लोकसभा सांसद रहे. 1980 में वे उत्तर प्रदेश के बागपत निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए. उस चुनाव में उनकी पत्नी गायत्री कैराना लोकसभा सीट से चुनी गई थीं. 1980 से 1984 के बीच दोनों एक साथ लोकसभा में थे. मधु और प्रमिला दंडवते (1980 से 1984 के बीच 7वीं लोकसभा)

भारत के पूर्व रेल और वित्त मंत्री प्रो. मधु दंडवते पांच बार सांसद रहे. 1980 में वे जनता पार्टी के टिकट पर महाराष्ट्र के राजापुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए. उनकी पत्नी प्रमिला दंडवते जनता पार्टी के टिकट पर बॉम्बे उत्तर मध्य निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गई थीं. दोनों 1980 से 1984 के बीच सातवीं लोकसभा में साथ थे.

राजेश रंजन उर्फ ​​पप्पू यादव और रंजीत रंजन (2004 से 2009 के बीच 14वीं लोकसभा; 2014 से 2019 के बीच 16वीं लोकसभा)

बिहार के नेता और छह बार सांसद रहे पप्पू यादव और उनकी पत्नी रंजीत रंजन 2004 और 2014 में एक साथ चुनाव जीतकर दो बार लोकसभा पहुंचे. हालांकि, दोनों ने अलग-अलग पार्टियों का प्रतिनिधित्व किया.

2004 में पप्पू यादव राजद के टिकट पर मधेपुरा से और उनकी पत्नी रंजीत लोक जन शक्ति पार्टी के टिकट पर सहरसा से निर्वाचित हुईं. 2014 में पप्पू यादव फिर से मधेपुरा से निर्वाचित हुए जबकि उनकी पत्नी रंजीत कांग्रेस के टिकट पर सुपौल लोकसभा सीट से जीतीं.

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