केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा कही गई बातों को लेकर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) ने अपना बयान जारी किया है. एआईकेएससीसी का कहना है कि मंत्रियों ने स्पष्ट रूप से 5 दिसंबर को 3 अधिनियमों को निरस्त करने की मांग पर विचार करने की पेशकश की थी, लेकिन वो पुराने प्रस्ताव के साथ वापस आ गए. बता दें कि शुक्रवार को कृषि मंत्री ने कहा था कि हमने किसानों से पूछा कि एपीएमसी को सुदृढ़ बनाने के लिए क्या करना चाहिए, इस पर किसानों ने कोई जवाब नहीं दिया, वह चुप हो गए.
इसके साथ ही एआईकेएससीसी ने अपने आंदोलन के बारे में बताया कि सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और पलवल में चल रहे धरना स्थलों में शामिल होने के लिए और अधिक किसान पहुंच चुके हैं. टोल प्लाजा मुक्त मार्ग, जयपुर-दिल्ली राजमार्ग नाकाबंदी, सभी जिलों में धरना और 14 दिसंबर के विरोध प्रदर्शन की पूरी तैयारी चल रही है. इसके साथ ही एआईकेएससीसी ने यह भी कहा कि वह सरकार के प्रस्ताव का विस्तृत खंडन भी जारी करेगी.
एआईकेएससीसी के कार्यकारी समूह ने कृषि मंत्री के इस दावे को खारिज कर दिया है कि किसान संघों ने विशेष मुद्दों को हल करने के सरकार के प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया और चले गए. 5 दिसंबर को सरकार ने सभी विशिष्ट समाधानों को बहुत विस्तार से समझाया था. इसके बाद जब किसान संगठनों ने हां या ना में स्पष्ट जवाब मांगा, तो कृषि मंत्री सहित उपस्थित मंत्रियों ने आपस में विचार-विमर्श किया और स्पष्ट रूप से कहा कि वे सरकार में चर्चा करेंगे और उनके पास वापस आएंगे.
देखें: आजतक LIVE TV
एआईकेएससीसी ने आगे कहा कि अब सरकार यह दावा कर रही है कि किसान संगठन बातचीत छोड़ वापस चले गए और ऐसे समय में जब वार्ता जारी है, तब उन्हें अपना आंदोलन तेज नहीं करना चाहिए. किसान संगठन बातचीत के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और जब भी सरकार ने बुलाया है हर बार जवाब दिया है. यह सरकार है जो 3 अधिनियमों और ईबी 2020 को निरस्त न करने की बात पर अडिग है जो किसानों की मुख्य मांग है.
एआईकेएससीसी ने अपने बयान में यह भी कहा कि सरकार ने एक विस्तृत दस्तावेज जारी किया है, जिसका शीर्षक है "पुटिंग फार्मर्स फर्स्ट", जिसमें मनगढ़ंत और काल्पनिक दावों की एक लंबी सूची है. AIKSCC देश के लोगों के लिए किसानों के मुद्दों पर एक विस्तृत खंडन और स्पष्टीकरण जारी करेगा.
पॉलोमी साहा