NEET पर फिर से बवाल, खडसे के इस्तीफे का क्या होगा असर, सुनें 'आज का दिन'

नीट परीक्षा के विरोध में तीन स्टूडेंट्स ने ख़ुदकुशी कर ली थी तब भी यहाँ प्रदर्शन हुए थे और अब यहीं से एक स्टूडेंट ने आरोप लगाया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया के बीच उसकी ओएमआर शीट से कुछ छेड़छाड़ की गई है. फिर तो दोबारा से शिकायतें आनी शुरू हो गईं.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

16 अक्टूबर को NEET का रिज़ल्ट आया था. तब से ही राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानि NTA गलत वजहों से चर्चा में है. स्टूडेंट्स शिकायत कर रहे हैं. गलत मार्किंग की शिकायत है. नंबर ठीक से नहीं दिए गए इसकी शिकायत है और शिकायतों की सीरियसनेस ऐसी थी कि बात अदालत में पहुँच गई. अब ख़बर आई है तमिलनाडु के कोयंबटूर से. नीट परीक्षा के विरोध में तीन स्टूडेंट्स ने ख़ुदकुशी कर ली थी तब भी यहाँ प्रदर्शन हुए थे और अब यहीं से एक स्टूडेंट ने आरोप लगाया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया के बीच उसकी ओएमआर शीट से कुछ छेड़छाड़ की गई है. फिर तो दोबारा से शिकायतें आनी शुरू हो गईं. हमने बात की आजतक रेडियो रिपोर्टर अक्षयानाथ से जो चेन्नई में हैं और उनसे जाना कि मसला क्या है?

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महाराष्ट्र में चुनाव तो नहीं है मगर एक दिलचस्प राजनीतिक घटना घट रही है. चालीस साल तक बीजेपी में रहनेवाले एकनाथ खडसे पार्टी छोड़ गए. खडसे पार्टी का बहुजन चेहरा रहे हैं. जब सरकार थी तो राजस्व मंत्री थे. उसके पहले की सरकारों में कृषि मंत्रालय भी सँभाला. बेटी भी उनकी लोकसभा की मेंबर हैं. करप्शन के आरोपों के बाद खडसे को राजस्व मंत्री का पद छोड़ना पड़ा था लेकिन उसके बाद पार्टी ने उन्हें टिकट भी नहीं दिया. वो छह बार लगातार विधायक रहे हैं और सरकार बनने से पहले नेता प्रतिपक्ष थे. ऐसे में सीएम बनने के उनके चांस एक समय प्रबल थे लेकिन देवेंद्र फडणवीस बाज़ी मार ले गए. अब भी खडसे ने पार्टी छोड़ी तो साफ़ कहा कि नाराज़गी उनकी पार्टी से नहीं बल्कि एक शख़्स से ही है. फ़िलहाल वो एनसीपी ज्वाइन कर रहे हैं. इस पालाबदल का महाराष्ट्र की राजनीति में कैसा असर होगा ये जानने के लिए हमने बात की सीनियर पत्रकार समर खडस से. 

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पाकिस्तान के सिर पर FATF की तलवार लटक रही है. उसका नाम ग्रे लिस्ट में है और ब्लैक लिस्ट में जा सकता है. वहीं प्रधानमंत्री इमरान खान देश के अंदर अपने खिलाफ चल रही मुहिम से परेशान हैं. माना तो ये जाता ही है कि इमरान खान प्रशासन पर सेना का भारी प्रेशर रहता है लेकिन अब सिंध प्रांत की पुलिस ने सेना के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है जिससे इमरान सरकार की स्थिति अजीब हो चली है. विपक्ष को मौक़ा मिल गया और कोरोना की परवाह ना करते हुए हज़ारों लोग सड़क पर आने लगे हैं. हमारे सहयोगी हैं मधुर जो अंतर्राष्ट्रीय ख़बरों पर नज़र रखते हैं, उनसे हमने बात की.

और ये भी जानिए कि 22 अक्टूबर की तारीख इतिहास के लिहाज़ से अहम क्यों है.. क्या घटनाएं इस दिन घटी थीं. अख़बारों का हाल भी चंद मिनटों में सुनिए और खुद को अप टू डेट कीजिए. इतना कुछ महज़ आधे घंटे के न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में नितिन ठाकुर के साथ.

'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें

 

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