यरवदा जेलः कैदियों का शानदार काम, हर साल 8 करोड़ की कमाई

पुणे की यरवदा जेल में कैदियों को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है. प्रशासन का मानना है कि जब कैदी जेल से रिहा होकर बाहर जाएं तो वे समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें और उन्हें मुश्किलें न आएं. इस जेल की कमाई करोड़ों में है.

Advertisement
यरवदा जेल प्रशासन ने शुरू की अनोखी पहल (प्रतीकात्मक तस्वीर) यरवदा जेल प्रशासन ने शुरू की अनोखी पहल (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पंकज खेळकर

  • पुणे,
  • 26 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 9:03 AM IST

  • देश में पहली बार कैदियों को सुधारने की हो रही ऐसी पहल
  • कैदियों को दी जाती है हेयर कटिंग और कपड़े प्रेस की ट्रेनिंग

महाराष्ट्र की यरवदा जेल में कैदियों के सुधार की सबसे बड़ी पहल चलाई जा रही है. कैदियों को सुधारने और उनके पुनर्वासन के मकसद से अलग-अलग तरीके के काम उनसे कराए जाते हैं. कैदियों को ट्रेनिंग भी दी जाती है. कैदियों से उद्योग के साथ-साथ खुद के हुनर वाले भी कई काम कराए जाते हैं. ऐसे उपक्रम बेहद कम जेलों में चलाए जाते हैं.

Advertisement

पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल ऐसे ही सुधारों की प्रयोगशाला बनती दिख रही है. इस जेल की कमाई करोड़ों में है. प्रशासन के मुताबिक इस जेल की कमाई 7 से 8 करोड़ रुपये सालाना है.

खास बात यह है कि इस जेल में जो उपक्रम सफल हो जाता है, उसे राज्य की अन्य जेलों में भी लागू  किया जाता है. इस बार यरवदा जेल के वरिष्ठ प्रशासन ने 100 दोषी कैदियों को हाई सैलून और कपड़े प्रेस कराने का हुनर भी सिखाया जाता है.

दोषी कैदियों में से कुछ को खुले जेल के लिए भी चुना गया है, वहीं दो दुकानों में कुछ चुने कैदी बाल काटते हैं, साथ ही कुछ को कपड़े प्रेस करने का काम दिया गया है.

यह भी पढ़ें: हाजीपुर जेल हत्याकांड के बाद बिहार की जेलों में ताबड़तोड़ छापेमारी

Advertisement

खास बात यह है कि दो दुकानें यरवदा जेल के बाहर एयरपोर्ट रोड पर स्थित हैं. जेल अधिकारियों की इस पहल की लोग तारीफ कर रहे हैं. नागरिकों के लिए शुरू किए गए हेयर कटिंग सलून में लोग बाल कटा रहे हैं.

रिहा होने पर काम आएगी ट्रेनिंग

पश्चिम महाराष्ट्र जेल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल योगेश देसाई ने आज तक से बातचीत में बताया कि जेल विभाग जेल के भीतर कैदियों को कई हुनर सिखा रहा है. हुनर सीखने के बाद कैदी बाहर मुख्य धारा में जाकर इन स्किल्स के जरिए जीवन-यापन कर सकते हैं. इन कैदियों को दी गई ट्रेनिंग जेल के बाहर बहुत काम आने वाली है. जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसे कैदी समाज के लिए खतरा नहीं बनेंगे और गुनाह की दुनिया में दोबारा कदम नहीं रखेंगे. इसी मकसद से कैदियों को बाहर ले जाकर उन्हें जीविका कमाने का मौका दिया जा रहा है.

यह भी पढ़ें: 'अपराध गाथा' के पोस्टर लगाकर JDU ने लालू यादव पर किया पलटवार

यरवदा जेल में 6 हजार कैदी

यरवदा जेल के अधीक्षक के मुताबिक जेल में कुल 6 हजार कैदी हैं. इनमें से 1500 कैदियों पर दोष साबित है, साथ ही उन्हें सजा सुनाई गई है. ऐसे कैदी जिनका बर्ताव अच्छा है, उन्हें खुली जेल में भेजा जाता है. ये बैरक जेल के बाहर होते हैं.

Advertisement

इसके पीछे मकसद आजाद माहौल में कैदियों के व्यवहार की निगरानी रखनी भी है. जेलों की ओर से कैदियों के सुधार का यह पहला मामला है. शहर के अन्य हेयर सलून और कपड़े प्रेस करने की दुकानों की तुलना में इन दुकानों पर चार्ज 30 फीसदी कम  है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement