पुणे: पंढरपुर यात्रा पर कोरोना का असर, इस बार नहीं जुटेगी लाखों की भीड़

महाराष्ट्र की 800 साल पुरानी प्रसिद्ध पंढरपुर धार्मिक यात्रा बेहद सादगी से पूरी की जाएगी. सामान्य दिनों में इस धार्मिक में लाखों श्रद्धालु जुटते थे. कोरोना वायरस संकट के चलते इस धार्मिक यात्रा में बेहद कम लोग शामिल होंगे.

Advertisement
कोरोना से प्रभावित होगी पंढरपुर यात्रा (फोटो क्रेडिट- pandharpurtemple.com) कोरोना से प्रभावित होगी पंढरपुर यात्रा (फोटो क्रेडिट- pandharpurtemple.com)

पंकज खेळकर

  • पुणे,
  • 30 मई 2020,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

  • कोरोना के चलते पंढरपुर धार्मिक यात्रा प्रभावित
  • नहीं जुटेंगे लाखों श्रद्धालु, सादगी से पूरी होगी यात्रा
कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप की वजह से महाराष्ट्र में साल में एक बार होने वाली सबसे बड़ी पंढरपुर धार्मिक यात्रा बेहद सादगी से संपन्न होगी. सामान्य दिनों में पंढरपुर यात्रा में 5 लाख से ज्यादा की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं.

इस धार्मिक यात्रा में श्रद्धालु आलंदी और देहु तीर्थ क्षेत्रों से 164 किलोमीटर पैदल चलकर पढंरपुर पहुंचते हैं. महाराष्ट्र के सबसे बड़े धार्मिक पर्व में इस बार लाखों श्रद्धालु हिस्सा नहीं लेंगे. पुणे में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस बात की जानकारी दी है.

Advertisement

12 जून को संत तुकाराम की पालकी का देहु से प्रस्थान होगा. 13 जून को संत ज्ञानेश्वर की पालकी आलंदी तीर्थ क्षेत्र से निकलेगी. इस प्रस्थान यात्रा में बेहद कम लोग शामिल होंगे.

आमतौर पर 21 दिनों के बाद अषाढ़ एकादशी के दिन पंढरपुर में भगवान विठ्ठल के दर्शन के साथ ही इस यात्रा का समापन होता है. इस वर्ष सभी संतों की चरण पादुकाएं देहु और आलंदी के मंदिर में दशमी तक रखी जाएंगी.

पंढरपुर यात्रा में श्रद्धालु करते हैं भगवान विट्ठल के दर्शन

विठ्ठलनाथ पर जुटते हैं संत

पंढरपुर बाड़ी की संत निवृत्ति, संत ज्ञानदेव, संत सोपान, संत मुक्ताई, संत एकनाथ, संत नामदेव और संत तुकाराम की पालकियां दशमी के दिन एकादशी से पहले हेलीकॉप्टर, कार या बस से पंढरपुर पहुंचेंगी. इन संतों से भगवान विठ्ठलनाथ की पारंपरिक भेंट कराई जाती है.

Advertisement

लाखों लोग करते हैं पदयात्रा

इस धार्मिक यात्रा में संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम की पादुकाओं के साथ सैकड़ों संतों की चरण पादुकाएं लेकर लोग पैदल पंढरपुर की यात्रा करते हैं. पुणे के विभागीय आयुक्त कार्यालय में संपन्न हुए बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर के अधिकारी समेत कई लोग मौजूद रहे.

बता दें इससे पहले साल 1912 में प्लेग के चलते और 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के चलते पंढरपुर में भक्तों की संख्या कम जुटी थी. यह परंपरा 800 साल पहले से शुरू हुई है. इस बार बेहद सादगी से यह यात्रा होने वाली है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement